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गंगा दशहरा पर पुण्य सलिला गंगा में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, तट पर दीपदान

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—प्राचीन दशाश्वमेध घाट सहित प्रमुख घाटों पर मेले जैसा नजारा, बाबा विश्वनाथ के दरबार में भी जलाभिषेक के लिए उमड़े श्रद्धालु

वाराणसी, 26 मई (हि.स.)। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि गंगा दशहरा पर मंगलवार को काशीपुराधिपति की नगरी में लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद गंगा किनारे विधिवत दीपदान व दान पुण्य कर श्री काशी विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। तड़के लगभग चार बजे से दिन चढ़ने तक श्रद्धालुओं का रेला गंगा में स्नान के लिए घाटों पर उमड़ता रहा।

महास्नान पर्व पर वाराणसी शहर के प्राचीन दशाश्वमेध घाट, राजेन्द्र प्रसाद घाट, शीतलाघाट, अहिल्याबाई घाट, पंचगंगा घाट, अस्सी, भैसासुर, खिड़किया घाट पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ जुटी रही। इसमें शहरियों की तुलना में ग्रामीणों की भीड़ ज्यादा रही। स्नानार्थियों के चलते गोदौलिया से दशाश्वमेधघाट तक मेले जैसा नजारा रहा। जिला प्रशासन ने गंगा तट से लेकर बाबा विश्वनाथ दरबार तक सुरक्षा के कड़े इन्तज़ाम किए थे। इस दौरान यातायात भी प्रतिबंधित किया गया था।

पुराणों के अनुसार मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण जेष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि में हस्त नक्षण वृष लग्न में हुआ था। आज ही के दिन हजारों साल पहले स्वर्ग की नदी गंगा धरती पर आईं थी और पापों का नाश कर प्राणियों का उद्धार करने के उद्देश्य से धरती पर ही रह गईं। तभी से इस तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। इस बार खास बात यह रही कि 26 मई मंगलवार को दशमी तिथि का मान सुबह 7:40 बजे तक रहा। और हस्त नक्षत्र का संयोग भी रहा।

ज्योतिषविद आचार्य रविन्द्र तिवारी बताते हैं कि गंगा जी का अवतरण हस्त नक्षत्र में हुआ था। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। गंगोत्री सेवा समिति के सदस्य रोहित पांडेय ने कहा कि यह पर्व सनातन आस्था का प्रतीक है। इस दिन माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की मान्यता है और इसी कारण गंगा स्नान, पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। देश के कोने-कोने से आई माताएं और बहनें माँ गंगा में स्नान कर अपने परिवार के कल्याण, बच्चों के बेहतर भविष्य और समाज में सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं। आज घाटों पर लाखों श्रद्धालु श्रद्धा और विश्वास के साथ मां गंगा का दर्शन कर रहे हैं।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने मां गंगा का किया अभिषेक, धाम में विशेष पूजा-अर्चना

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी गंगा दशहरा पर्व के उपलक्ष्य में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने भी धाम में विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन संपन्न किया । इस अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में विशेष पूजा-अर्चना एवं वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन संपन्न हुआ। प्रातःकाल वेला में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के घाट पर माँ गंगा की विधिवत आरती के उपरांत मां गंगा का अभिषेक सम्पन्न किया गया। इसके उपरांत धाम स्थित मंदिर परिसर में विराजमान मां गंगाजी के विग्रह पर विधिवत पूजन अर्चन संपन्न हुआ। इस पुण्य अवसर पर मंदिर न्यास के अधिकारी, कार्मिक, अर्चक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।

मां गंगा की प्रतिमा का भव्य श्रृंगार एवं षोडशोपचार विधी से पूजन, दुग्धाभिषेक

गंगा दशहरा पर प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति की ओर से पं. किशोरी रमण दुबे ‘बाबू महाराज’ की अगुवाई में मां गंगा के प्रतिमा का भव्य श्रृंगार कर विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच षोडशोपचार पूजन किया गया। बाबू महाराज ने बताया कि गंगा दशहरा पर शाम को मां गंगा की महाआरती की जायेगी। घाट पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा। इस मौके पर विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान होंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी