वाराणसी : गंगा और वरुणा का जलस्तर बढ़ने से हालात हुए विकट, वरूणा के तटवर्ती 15 मोहल्ले जलमग्न
जनजीवन ठहरा,व्यापार और कारोबार भी प्रभावित, प्रभावित ग्रामीण अंचल मुख्य मार्ग से कटे
वाराणसी, 03 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगा और उसकी सहायक नदी वरुणा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ के हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। बांधों से पानी छोड़े जाने और लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। नदी के पलट प्रवाह से वरुणा के तटवर्ती 15 मोहल्लों में पानी घुस गया है। कई इलाके टापू में तब्दील हो गए हैं। वहीं, ग्रामीण अंचलों के 14 गांवों में कृषि कार्य और कारोबार प्रभावित हुआ है।
केंद्रीय जल आयोग के राजघाट गेज साइट के अनुसार, गुरुवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 70.54 मीटर दर्ज किया गया, जो सुबह आठ बजे बढ़कर 70.56 मीटर हो गया। दोपहर 12 बजे जलस्तर 70.60 मीटर दर्ज किया गया। वाराणसी में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है। पिछले 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में करीब 28 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान 28.2 मिलीमीटर बारिश भी हुई।
पूर्वांचल के कई जिलों में गंगा और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राहत आयुक्त की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, गाजीपुर में गुरुवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 63.47 मीटर रहा, जो खतरे के निशान से 0.37 मीटर ऊपर है। यहां जलस्तर में 10 मिलीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ाव जारी रहा। सैदपुर में गंगा का जलस्तर 67.58 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 0.39 मीटर ऊपर है।
वाराणसी के तेंदुई में वरुणा नदी का जलस्तर 71.60 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 1.39 मीटर ऊपर है। बलिया में गंगा 59.65 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के निशान से 2.03 मीटर ऊपर और पूर्व उच्चतम स्तर से 0.74 मीटर नीचे है। वहीं, मीरजापुर के नारायणपुर में गंगा का जलस्तर 72.97 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 0.38 मीटर ऊपर है।
घाटों पर आवाजाही प्रभावित, गंगा आरती छत पर
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वाराणसी के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। दशाश्वमेध और अस्सी घाट के बीच कई घाटों पर बाढ़ का पानी भर जाने से आवाजाही प्रभावित हुई है। श्रद्धालुओं की संख्या घटने से घाटों पर होने वाला कारोबार भी प्रभावित हुआ है। नौका संचालन बंद होने से नाविकों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया है।
दशाश्वमेध जल पुलिस चौकी में भी बाढ़ का पानी भर गया है। गंगा में तेज बहाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाते हुए नाव और स्टीमर संचालन पर रोक लगा दी है।
घाटों और आसपास की गलियों का संपर्क प्रभावित होने के कारण दशाश्वमेध घाट की विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती अब छत पर कराई जा रही है। वहीं, मोक्षतीर्थ मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार और शवदाह ऊंचे प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है। शवदाह स्थल तक गलियों से पहुंचना मुश्किल होने के कारण कई स्थानों पर शव ले जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
वरुणा के 15 मोहल्ले प्रभावित
गंगा के पलट प्रवाह से वरुणा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कोनिया, शैलपुत्री, सरैया, अलईपुर, नक्खीघाट, ढेलवरिया, चौकाघाट और हुकुलगंज समेत कई तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, वरुणा नदी की बाढ़ से 15 मोहल्ले प्रभावित हुए हैं। प्रभावित मोहल्लों में सरैया, सलारपुर, नक्खीघाट, कोनिया, हुकुलगंज, पुलकोहना, रसूलगढ़, ढेलवरिया, बघवानाला, दनियालपुर, शैलपुत्री, सिकरौल, रूप्पनपुर, पैगंबरपुर और तपोवन शामिल हैं।
14 गांवों में कृषि और कारोबार प्रभावित
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर तेजी से बढ़ रहा है। रामपुर ढाब, मोकलपुर, गोबरहा, दुबरिया, पिपरी, टेकुरी, छितौनी, टड़िया, कोटवा, कोरौत, धरहरा, लूठा, अंबा और लक्ष्मीसेनपुर समेत 14 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में कृषि कार्य के साथ स्थानीय व्यापार और आवागमन भी प्रभावित हुआ है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए कुल 17 सक्रिय राहत शिविर बनाए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में एनडीआरएफ, जल पुलिस और पीएसी के जवानों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा और वरुणा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। तटवर्ती इलाकों में राहत एवं बचाव व्यवस्था को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

