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वाराणसी में इस बार अंगकोर वाट की अनुकृति में सजेगा हथुआ मार्केट का दुर्गापूजा पंडाल

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वाराणसी में इस बार अंगकोर वाट की अनुकृति में सजेगा हथुआ मार्केट का दुर्गापूजा पंडाल


वाराणसी, 27 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दुर्गापूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। शहर के विभिन्न पूजा पंडालों को भव्य और आकर्षक रूप देने के लिए कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं। इसी क्रम में शहर के प्रसिद्ध हथुआ मार्केट स्थित प्रीमियर बॉयज क्लब की दुर्गापूजा इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है। क्लब के 51वें वर्ष में पंडाल को कंबोडिया के विश्वप्रसिद्ध प्राचीन मंदिर अंगकोर वाट की स्थापत्य कला की अनुकृति के रूप में तैयार किया जा रहा है।

पंडाल में अंगकोर वाट के विशाल शिखरों, विशिष्ट प्रवेश संरचना और बारीक शिल्पकारी की झलक देखने को मिलेगी। आयोजकों के अनुसार, वाराणसी में पहली बार किसी विदेशी मंदिर की स्थापत्य शैली को दुर्गापूजा पंडाल की थीम बनाया जा रहा है। भव्य प्रकाश-सज्जा के बीच पंडाल श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगा।

पंडाल की ऊंचाई करीब 60 फीट और चौड़ाई 55 फीट होगी। इसमें तीन शिखर बनाए जा रहे हैं। प्रवेश द्वार पर छह-छह फीट ऊंचे दो आकर्षक शेर भी तैयार किए जा रहे हैं। पंडाल में अंगकोर वाट की स्थापत्य कला के साथ उसकी विशिष्ट शिल्प शैली और आभा को उकेरने का प्रयास किया जा रहा है।

इस बार करीब तीन दशक बाद प्रीमियर बॉयज क्लब में मां दुर्गा की प्रतिमा भारतीय पारंपरिक शैली में विराजमान होंगी। आयोजकों ने इस बार इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से मूर्तियों को प्रदर्शित करने के बजाय पारंपरिक प्रतिमा और पूजा पद्धति को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। पिछले वर्ष क्लब का पंडाल मैसूर की चामुंडा देवी मंदिर की थीम पर तैयार किया गया था।

पंडाल की डिजाइन आईआईटी-बीएचयू के पूर्व छात्र युवा हर्ष गुप्ता ने तैयार की है।

क्लब के संरक्षक डॉ. रमेशदत्त पांडेय, महामंत्री चंद्रप्रकाश जायसवाल और कोषाध्यक्ष डॉ. संजय गुप्ता ने रविवार को बताया कि पंडाल का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसे 14 अक्टूबर तक पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि 12वीं शताब्दी में निर्मित अंगकोर वाट मंदिर की स्थापत्य विशेषताओं को पंडाल में आधुनिक प्रकाश-सज्जा के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। उन्हें उम्मीद है कि यह पंडाल दुर्गापूजा के दौरान वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां 16 अक्टूबर से पूजा-अर्चना शुरू होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी