विभाजन की विभीषिका की सच्चाई सामने लाने के लिए राष्ट्रीय जाँच आयोग गठित हो
—अधिवक्ताओं के एक दल ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा
वाराणसी, 14 अगस्त (हि.स.)। वर्ष 1947 में भारत-विभाजन की परिस्थितियों, उसके कारणों, सीमा निर्धारण तथा विभाजन के दौरान हुई व्यापक मानवीय त्रासदी की स्वतंत्र, निष्पक्ष जाँच की मांग को लेकर शुक्रवार को अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा।
राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन के जरिए अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से मांग किया कि केंद्र सरकार इस ऐतिहासिक मानवीय विषय पर “राष्ट्रीय विभाजन त्रासदी एवं परिस्थितियाँ जाँच आयोग” का गठन करे।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि इस मांग का उद्देश्य किसी धर्म, जाति, समुदाय, राजनीतिक दल अथवा वर्तमान पीढ़ी को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि वर्ष 1947 की घटनाओं के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों, निर्णय-प्रक्रिया और मानवीय त्रासदी को उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों, सरकारी दस्तावेजों, प्रत्यक्षदर्शी गवाहियों तथा अन्य प्रमाणों के आधार पर समझना और राष्ट्रीय अभिलेख के रूप में सुरक्षित करना है। जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद अधिवक्ता व भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र शंशाक शेखर त्रिपाठी ने पत्रकारों को बताया कि वर्ष 1947 का विभाजन केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं का परिवर्तन नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाली अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी थी।
विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा, हत्या, आगजनी, लूट, विस्थापन, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अत्याचार, अपहरण तथा परिवारों के बिछड़ने की घटनाएँ हुईं। उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका की सच्चाई और उसके वास्तविक कारणों को जानने के लिए तत्कालीन राजनीतिक एवं प्रशासनिक परिस्थितियों का निष्पक्ष अध्ययन आवश्यक है। यह भी सामने आना चाहिए कि विभाजन का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया, सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया किस प्रकार निर्धारित हुई और संभावित हिंसा एवं जन-विस्थापन से निपटने के लिए तत्कालीन प्रशासन की क्या तैयारियाँ थीं।
प्रतिनिधिमंडल ने भारत, ब्रिटेन, पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अन्य देशों में उपलब्ध विभाजन संबंधी अभिलेखों के अध्ययन एवं डिजिटलीकरण की मांग की। इसमें सरकारी फाइलें, पुलिस एवं सैन्य रिकॉर्ड, शरणार्थी रिकॉर्ड, समाचार-पत्र, निजी पत्र, डायरी, मानचित्र और अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों को शामिल करने की मांग की गई। प्रतिनिधि मंडल में अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी,अधिवक्ता आशुतोष शुक्ला,जितेंद्र तिवारी आदि शामिल रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

