इतिहास से सबक लेना जरूरी : योगी आदित्यनाथ
—वाराणसी स्थित भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री
बोले—किसी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती
वाराणसी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि किसी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, बल्कि उसकी संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से भी होती है। जब राष्ट्र संकट में पड़ता है, तो उसकी विरासत, आध्यात्मिक धरोहर, ऐतिहासिक धरोहर, धर्म और संस्कृति भी संकट का सामना करती हैं। ऐसे में इतिहास से सबक लेना जरूरी हो जाता है।
मुख्यमंत्री दो दिवसीय वाराणसी दौरे में सिगरा स्थित भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज के बंटने का खामियाजा देश को अपनी विरासत पर हुए आक्रमणों के रूप में भुगतना पड़ा। जब हम बंटे, इसलिए विदेशी आक्रांताओं को मौका मिल गया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या रामजन्मभूमि और मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर आक्रांताओं के हमले का उल्लेख कर कहा कि अगर समाज एकजुट रहता, तो क्या रामजन्मभूमि पर 500 वर्षों तक गुलामी का कलंक खड़ा रह पाता, क्या मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ऐसी स्थिति पैदा होती?। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय एकता, सनातन संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर बल देते हुए सनातनी समाज को इतिहास से सीख लेने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि समाज के बंटवारे के कारण पैदा हुई परिस्थितियों को बदलने के लिए देश के संतों ने अलग-अलग कालखंडों में बड़ी भूमिका निभाई। समाज में जागरूकता लाने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने के लिए महाजागरण के अभियान चलाए। स्वामी प्रणवानंद के कार्यो का उल्लेख कर कहा कि स्वामी जी ने आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया। इस संस्था ने कभी विकट परिस्थितयों में अपना आदर्श नहीं छोड़ा।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

