बीएचयू : स्पंदन 2026 में रंगमंच और नृत्य की शानदार प्रस्तुति, शताब्दी भवन बना सृजनात्मक संवाद स्थल
चक्रव्यूह में प्रवेश करते वीर अभिमन्यु के साहस का मंचन,19 टीमों ने सहभागिता की
वाराणसी, 22 फरवरी (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू ) परिसर में आयोजित स्पंदन 2026 के द्वितीय दिवस रविवार को भी सृजनात्मक ऊर्जा, सामाजिक चेतना और कलात्मक अभिव्यक्ति दिखी। कृषि विज्ञान संस्थान स्थित शताब्दी भवन के मंच से लेकर विश्वविद्यालय के एम्फीथिएटर मैदान तक, वातावरण नाट्य एवं नृत्य प्रस्तुतियों की प्रभावशीलता से गुंजायमान रहा।
शताब्दी भवन में आयोजित लघु नाट्य प्रतियोगिता में विभिन्न संकायों, महाविद्यालयों एवं संबद्ध संस्थानों की 19 टीमों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की। प्रस्तुतियों में भ्रष्टाचार, ऑनलाइन ठगी, राजनीतिक पाखंड, दहेज मृत्यु, पर्यावरणीय क्षरण, मानसिक स्वास्थ्य, समलैंगिक समुदाय की स्वीकृति तथा काशी की सांस्कृतिक चेतना जैसे समकालीन विषयों को प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। ‘मुलाकात-ए-वाराणसी’, ‘पागलों की दुनिया’, ‘मुक्ति या प्रपंच’ तथा चार्ली चैपलिन की प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहीं। यहां प्रो. प्रवीण प्रकाश, विभागाध्यक्ष, पादप शरीरक्रिया विज्ञान विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान, के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों की उपस्थिति रही। इसके अलावा परिसर स्थित एम्फीथिएटर मैदान सृजनात्मक मंचकला खंड का सजीव केंद्र बन गया, जहाँ सृजनात्मक नृत्य प्रतियोगिता एवं नृत्य-रचना (कोरियोग्राफी) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विभिन्न संकायों के छात्र प्रतिभागियों ने शास्त्रीय परंपरा और समकालीन चिंतन का सशक्त समन्वय प्रस्तुत किया। प्रस्तुतियों में शिव तांडव, दक्ष यज्ञ, महाकाली स्वरूप, महाभारत में श्रीकृष्ण की भूमिका तथा गंगा की पवित्रता जैसे पौराणिक प्रसंगों का सजीव चित्रण किया गया। साथ ही, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक कुरीतियाँ, शोषण एवं उत्पीड़न जैसे समकालीन मुद्दों पर भी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दी गईं। ‘समाचार पत्र’ विषय पर आधारित एक नृत्य-रचना में वर्तमान घटनाओं का नाट्य रूपांतरण करते हुए सामाजिक संबंधों में घटते विश्वास पर चिंता साफ दिखी। सूफी शैली में आत्मा और परमात्मा के मध्य प्रेम के सात चरणों का चित्रण तथा काशी की गंगा आरती की आध्यात्मिक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अन्य प्रस्तुतियों में चित्रांगदा, दुर्गा, काली तथा चक्रव्यूह में प्रवेश करते अभिमन्यु के साहस का चित्रण करते हुए त्याग, शक्ति और धर्म-अधर्म के शाश्वत संघर्ष को उकेरा गया। नृत्य-रचना प्रतियोगिता का संयोजन महिला महाविद्यालय के भूगोल विभाग की प्रो. सीमा तिवारी एवं उनकी आयोजन टीम द्वारा किया गया। ‘महिला सशक्तिकरण’ विषय पर केंद्रित इस प्रतियोगिता में 22 प्रतिभागियों ने दस-दस मिनट की प्रभावपूर्ण प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें भाव-भंगिमा, संगीत और मंच-सज्जा का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

