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बीएचयू के शोधार्थी विशाल कुमार को जापान में मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

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बीएचयू के शोधार्थी विशाल कुमार को जापान में मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान


-खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी में शोध उपलब्धि को मिली वैश्विक पहचान, ‘इमर्जिंग स्कॉलर अवॉर्ड’ से सम्मानित

वाराणसी, 16 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कृषि विज्ञान संस्थान के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग में खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी विषय में पीएचडी कर रहे शोधार्थी विशाल कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। जापान में आयोजित 16वें अंतरराष्ट्रीय खाद्य अध्ययन सम्मेलन में उन्हें प्रतिष्ठित ‘इमर्जिंग स्कॉलर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

ओसाका विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

बीएचयू के जनसम्पर्क कार्यालय के अनुसार, यह सम्मेलन 10 से 12 अक्टूबर तक जापान के ओसाका विश्वविद्यालय स्थित सेंटर फॉर एजुकेशन इन लिबरल आर्ट्स एंड साइंस में आयोजित किया गया। इसका आयोजन कॉमन ग्राउंड रिसर्च नेटवर्क्स ने फूड स्टडीज़ रिसर्च नेटवर्क के सहयोग से किया। सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, मलेशिया, सिंगापुर सहित 85 अन्य देशों के प्रतिभागियों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित इस सम्मेलन में शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष तथा ऑनलाइन माध्यम से अपने शोध प्रस्तुत करने और विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला।

टिकाऊ पैकेजिंग पर शोध प्रस्तुति को मिली पहचान

सम्मेलन में विशाल कुमार ने “खाद्य संरक्षण के लिए टिकाऊ पैकेजिंग सामग्री: रोज़ेला एंथोसाइनिन युक्त जैव-अपघटनीय रोगाणुरोधी κ-कैराजीनन/एचपीएमसी फ्रेश-चेक इंडिकेटर फिल्म” विषय पर मौखिक शोध-प्रस्तुति दी। उनका शोध टिकाऊ खाद्य पैकेजिंग सामग्री के विकास पर केंद्रित है। इसमें रोज़ेला से प्राप्त एंथोसाइनिन युक्त जैव-अपघटनीय फिल्म की संभावनाओं का अध्ययन किया गया है। इस प्रकार की सामग्री खाद्य संरक्षण, रोगाणुरोधी गुणों और खाद्य की ताजगी के संकेतक के रूप में उपयोगी साबित हो सकती है।

टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और जल प्रबंधन पर रहा जोर

सम्मेलन का मुख्य विषय “लिविंग विद वाटर: फूड एंड लाइफ” था। इसके तहत जल संसाधनों, खाद्य उत्पादन, सतत विकास और मानव कल्याण के बीच संबंधों पर चर्चा की गई। खाद्य उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और पोषण में जल की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए इसके जिम्मेदार उपयोग तथा टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के विकास पर विशेष जोर दिया गया।

वर्ष 2011 में स्थापित फूड स्टडीज़ रिसर्च नेटवर्क खाद्य उत्पादन की स्थिरता, मानव पोषण और खाद्य प्रणालियों के सांस्कृतिक प्रभावों से जुड़े नए दृष्टिकोणों को प्रोत्साहित करता है।

खाद्य-योग्य कटलरी के विकास पर भी कर रहे हैं शोध

विशाल कुमार का शोध खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के अंतर्गत खाद्य-योग्य कटलरी के विकास और उसके गुणों के वैज्ञानिक मूल्यांकन पर भी केंद्रित है। खाद्य-योग्य कटलरी पारंपरिक एकल-उपयोग वाले बर्तनों का वैकल्पिक विकल्प है, जिसे इस्तेमाल के बाद खाया जा सकता है या उपयुक्त परिस्थितियों में जैव-अपघटित किया जा सकता है। इस क्षेत्र में शोध का उद्देश्य खाद्य-आधारित सामग्रियों से नवीन उत्पाद विकसित करना, अपशिष्ट कम करने की संभावनाओं का पता लगाना और नवीकरणीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना है।

विभागाध्यक्ष और शोध-पर्यवेक्षक ने दी बधाई

जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार, दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आर. के. डुआरी ने विशाल कुमार को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि ‘इमर्जिंग स्कॉलर अवॉर्ड’ किसी युवा शोधकर्ता की शैक्षणिक यात्रा में उत्साह बढ़ाने वाली उपलब्धि है। विशाल कुमार के शोध-पर्यवेक्षक डॉ. अरविंद ने भी उन्हें इस सम्मान के लिए बधाई दी और भविष्य में निरंतर प्रगति तथा सफलता की शुभकामनाएं दीं। इस उपलब्धि को बीएचयू में खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे शोध कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी