करुणा, मैत्री, अहिंसा तथा सम्यक स्मृति के सिद्धांत आज भी प्रांसगिक : के. सिरी सुमेधा महाथेरो
—बीएचयू के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग में बुद्ध जयंती मनी
वाराणसी, 02 मई (हि.स.)। वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु एवं विहाराधिपति, जंबूद्वीप श्रीलंका बौद्ध मंदिर, सारनाथ के. सिरी सुमेधा महाथेरो ने कहा कि करुणा, मैत्री, अहिंसा तथा सम्यक स्मृति के सिद्धांत आज भी विश्व में प्रासंगिक है। विश्व में शांति, सौहार्द और आंतरिक संतुलन स्थापित करने के लिए आवश्यक भी हैं। के. सिरी सुमेधा महाथेरो शनिवार को पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आयोजित बुद्ध जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। बतौर मुख्य अतिथि महाथेरो ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की शाश्वत प्रासंगिकता को बताया। उन्होंने बौद्ध अध्ययन की गौरवशाली परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए बीएचयू के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुषमा घिल्डियाल (संकाय प्रमुख, कला संकाय बीएचयू) ने मूल्यों, सहिष्णुता एवं मानवीय दृष्टिकोण को आत्मसात करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि बीएचयू का यह विभाग भारत में बौद्ध अध्ययन एवं पालि भाषा के प्रमुख केन्द्रों में से एक है। दीर्घकाल से बौद्ध विद्वत्ता, सांस्कृतिक परम्पराओं एवं शैक्षिक गतिविधियों के संवर्धन में लगा हुआ है।
इसके पहले कार्यक्रम का शुभारम्भ परम्परानुसार बाल-बुद्ध की प्रतिमा पर सुगंधित जलाभिषेक से हुआ। इसके उपरान्त भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्पार्पण किया गया। बताया गया कि बुद्ध जयंती का यह पर्व विश्वभर में भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, संबोधि तथा महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है। कार्यक्रम में चीन के क्वाङ्ग्चौ विश्वविद्यालय के डा. विवेकमणि त्रिपाठी ने चीन के संस्मरणों के आधार पर चीन में बौद्ध धर्म की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम को प्रो. प्रदुम्न दुबे,प्रो. हरिशंकर शुक्ल ने भी संबोधित किया। अतिथियों का स्वागत अध्यक्ष, पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग प्रो.अरुण कुमार यादव ने किया। जयंती समारोह में प्राध्यापकों, भिक्षु-भिक्षुणियों, शोधार्थियों एवं विभाग के विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

