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बीएचयू के दृश्य कला संकाय ने अपने पहले स्कोपस-अनुक्रमित प्रकाशन के साथ बड़ी उपलब्धि पाई

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बीएचयू के दृश्य कला संकाय ने अपने पहले स्कोपस-अनुक्रमित प्रकाशन के साथ बड़ी उपलब्धि पाई


—जलवायु परिवर्तन के युग में डिजिटल विज्ञापन की भूमिका को किया पुनर्परिभाषित

वाराणसी,03 अप्रैल (हि.स.)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के व्यावहारिक कला विभाग, दृश्य कला संकाय ने अपने पहले स्कोपस-अनुक्रमित प्रकाशन के साथ एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह शोध इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट में प्रकाशित हुआ है। यह जलवायु परिवर्तन के युग में डिजिटल विज्ञापन की भूमिका को पुनर्परिभाषित करने वाला महत्वपूर्ण शोध है। वैश्विक सतत विकास पर चर्चा में महत्वपूर्ण विज्ञापन पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा सकता है। इस अध्ययन के लेखक प्रो. मनीष अरोरा,डॉ. पीयूष कुमार गुप्ता,प्रो. प्रशांत कुमार श्रीवास्तव के अनुसार जलवायु परिवर्तन के युग में विज्ञापन पर्यावरण संरक्षण के लिए डिजिटल मीडिया रणनीतियों को पुनर्परिभाषित करना” शीर्षक वाला यह शोध अनुभवजन्य, सांख्यिकीय और विषयगत साक्ष्य प्रस्तुत करता है। लेखकों के अनुसार इसे आईसीएसएसआर-इम्प्रेस राष्ट्रीय नीति अनुसंधान कार्यक्रम के तहत वित्त पोषित किया गया है।

—शोध का खास उद्देश्य

प्रो.मनीष अरोरा के अनुसार यह अध्ययन जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में डिजिटल मीडिया आधारित विज्ञापन रणनीतियों की प्रभावशीलता का विश्लेषण करता है। शोध में अभिसारी मिश्रित पद्धति का उपयोग किया गया, जिसमें मात्रात्मक सर्वेक्षण, विशेषज्ञ साक्षात्कार आधारित गुणात्मक विश्लेषण दोनों को सम्मिलित कर व्यापक निष्कर्ष प्राप्त किए गए। शोध के निष्कर्षो में पर्यावरण-केन्द्रित डिजिटल अभियानों से उपभोक्ता व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन, ब्रांड निष्ठा एवं जन-विश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि, विज्ञापन सामग्री और उपभोक्ता व्यवहार के बीच अत्यंत उच्च सह सम्बन्ध,शोध उपकरणों की उच्च विश्वसनीयता,संरचनात्मक विश्लेषण के लिए डेटा की उत्कृष्ट उपयुक्तता, टिकाऊ विज्ञापन के 8 प्रमुख रणनीतिक आयामों की पहचान है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी