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बीएचयू के सर सुंदरलाल चिकित्सालय में जांघ के विशाल गांठ का सफल ऑपरेशन

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बीएचयू के सर सुंदरलाल चिकित्सालय में जांघ के विशाल गांठ का सफल ऑपरेशन


——20 वर्षो से मरीज बेहाल रहा, प्रो. डॉ. राम निवास मीणा के निर्देशन में मिली सफलता

वाराणसी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) के सर सुंदरलाल चिकित्सालय में गाजीपुर निवासी 50 वर्षीय पुरुष मरीज की बाईं जांघ में मौजूद लगभग विशाल गांठ का सफल शल्य क्रिया की गई। लगभग 12 गुणे सात गुणे पांच इंच आकार की विशाल गाँठ की पीड़ा से मरीज 20 वर्षाें से बेहाल रहा।

मरीज के अनुसार, उनकी जांघ में यह सूजन लगभग 20 वर्षों से मौजूद थी। पिछले तीन वर्षों में इसका आकार तेजी से बढ़ने लगा था। इस दौरान मरीज ने अनेक चिकित्सकों से परामर्श लिया और विभिन्न स्थानों पर उपचार की तलाश की। लंबे समय से मौजूद इस गाँठ और इसके लगातार बढ़ते आकार के कारण मरीज काफी परेशान थे। अंततः वे बेहतर एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा की तलाश में सर सुंदरलाल चिकित्सालय पहुँचे। यहां अल्ट्रासोनोग्राफी में बाईं जांघ की मांसपेशियों के भीतर एक बड़ी, ठोस एवं विषम संरचना वाली गाँठ पाई गई थी। इसके आकार और स्थिति को देखते हुए विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन तथा सावधानीपूर्वक शल्य चिकित्सा की योजना बनाना आवश्यक था। गाँठ का आकार अत्यधिक बड़ा होने तथा बाईं निचली टांग को रक्त आपूर्ति करने वाली प्रमुख रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाओं के निकट स्थित होने के कारण यह ऑपरेशन जटिल एवं जोखिमपूर्ण था। ऐसी स्थिति में आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखते हुए गाँठ को निकालने के लिए अत्यंत सावधानीपूर्वक शल्य विच्छेदन और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वय आवश्यक था।

मरीज को प्रो. डॉ. राम निवास मीणा के अधीन भर्ती किया गया था। उनके साथ इस शल्य प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. प्रखर जायसवाल, सहायक आचार्य, सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग ने किया। शल्य चिकित्सा दल में जूनियर रेजिडेंट डॉ. तुषार, डॉ. सवन्ना एवं डॉ. अंकित मीणा शामिल थे। एनेस्थीसिया दल में परामर्शदाता डॉ. एस. पी. मिश्रा तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. पुनीत शामिल रहे। ऑपरेशन के दौरान नर्स अपराजिता और ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन संजय ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

चिकित्सकों के अनुसार, यह मामला लंबे समय से मौजूद तथा लगातार बढ़ने वाली सॉफ्ट टिश्यू गाँठों के विशेषज्ञ मूल्यांकन के महत्व को रेखांकित करता है। ऐसी गाँठों की प्रकृति का निर्धारण केवल उनके आकार या बाहरी स्वरूप के आधार पर विश्वसनीय रूप से नहीं किया जा सकता। गाँठ के निष्कासित नमूने की हिस्टोपैथोलॉजिकल जाँच से ही अंतिम निदान स्थापित होगा तथा आवश्यकता पड़ने पर आगे के उपचार की दिशा निर्धारित की जा सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी