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बाल संरक्षण संस्थानों में रह रहे बच्चों के समग्र विकास के लिए बीएचयू करेगा सहयोग

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बाल संरक्षण संस्थानों में रह रहे बच्चों के समग्र विकास के लिए बीएचयू करेगा सहयोग


— महिला एवं बाल विकास विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

वाराणसी, 29 मई (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू ) व महिला एवं बाल विकास विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, ने पारस्परिक सहयोग से व एक दूसरे की क्षमताओं व विशेषज्ञता का लाभ लेते हुए बाल संरक्षण केन्द्र, रामनगर, में रह रहे बच्चों के समग्र विकास के लिए सहयोग करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। यह पहल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रहे ऐसे बच्चों को उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर करने में अनुकरणीय साबित हो सकती है, जो बाल संरक्षण केन्द्रों में रह रहे हैं। शुक्रवार को कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह तथा महिला एवं बाल विकास विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, की ओर से ज़िलाधिकारी, वाराणसी, सतेन्द्र कुमार, आईएएस, ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये।

समझौते का उद्देश्य दोनों संस्थानों द्वारा पारस्परिक क्षमताओं के माध्यम से विकास के नए अवसरों का सृजन करना है। सहमति के तहत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय रामनगर, वाराणसी, स्थित बाल संरक्षण संस्थान के माध्यम से वहां रह रहे बच्चों के शैक्षणिक, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य एवं जीवन कौशल विकास हेतु सहयोग प्रदान करेगा। इस के अतिरिक्त बीएचयू के विद्यार्थियों के लिए प्रायोगिक शिक्षा, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप एवं शोध अवसर भी उपलब्ध होंगे। इस प्रकार पारस्परिक सहयोग व विशेषज्ञता के ज़रिये बच्चों के व्यक्तित्व, नेतृत्व एवं रोज़गारपरक कौशल का विकास हो सकेगा। इस अवसर पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने तथा सुधारात्मक पहलों को क्रियान्वित करने में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रभावित बच्चों को कौशल व नेतृत्व क्षमता विकास, तथा उनके व्यक्त्तित्व को सशक्त बनाने में नवोन्मेषी कार्यक्रमों औऱ गतिविधियों के माध्यम से जीवन को नई ऊर्जा व दृष्टिकोण से जीने की राह दिखाएगा।

ज़िलाधिकारी, सतेन्द्र कुमार ने कहा कि बाल संरक्षण केन्द्र में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे होते हैं, जिन्होंने अत्यंत विषम परिस्थितियों का सामना किया होता है। ऐसे में उनके व्यक्तित्व विकास तथा आत्मविश्वास निर्माण हेतु नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिससे न सिर्फ उन्हे आगे बढ़ने के प्रति नई दिशा मिले, बल्कि वे समाज की मुख्य धारा से भी आसानी से जुड़ सकें। ज़िला जज, संजीव शुक्ला ने सुझाव दिया कि इन केन्द्रों में रह रही लड़कियों के समग्र विकास के लिए संगठित व संस्थागत प्रयास आवश्यक हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी