बीएचयू के लामबंद शिक्षक विभिन्न मांगों को लेकर केन्द्रीय कार्यालय पहुंचे, अफसरों से मिले
—नोशनल इंक्रीमेंट, पूर्व सेवा की गणना, पीडीएफ आदि समस्याओं के समाधान की मांग
वाराणसी, 01 अप्रैल (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के शिक्षकों ने विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर बुधवार को विश्वविद्यालय के केन्द्रीय कार्यालय में अफसरों से मुलाकात की। इस दौरान लामबंद शिक्षकों के दल ने नोशनल इंक्रीमेंट, पूर्व सेवा गणना, पीडीएफ एवं डीएसीपी के तहत कैरियर विकास की बाधाएं तुरंत दूर करने की मांग की। शिक्षकों ने यूजीसी के अन्य विश्वविद्यालयों के अनुरूप नोशनल इंक्रीमेंट, पूर्व सेवा की गणना, पीडीएफ तथा मेडिकल कॉलेज में डीएसीपी के तहत प्रमोशन एवं कैरियर विकास संबंधी सभी बाधाओं को तुरंत हटाने पर बल दिया।
शिक्षकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डिप्टी रजिस्ट्रार (एडमिन) वाई. वेलु तथा डिप्टी रजिस्ट्रार अजय विश्वविद्यालय के नियमों को तोड़-मरोड़कर गलत व्याख्या कर रहे हैं। शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यकारी परिषद (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) द्वारा गठित ग्रेवांस कमेटी की सिफारिशों की गोपनीयता भंग की जा रही है तथा रिपोर्ट को कुलसचिव के माध्यम से जानबूझकर विलंबित किया जा रहा है। नियमानुसार कमेटी की रिपोर्ट हायर ग्रेवांस कमेटी को समीक्षा के लिए भेजी जानी थी, किंतु मेंबर सेक्रेटरी ने रिपोर्ट सीधे कुलसचिव को सौंप दी, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
शिक्षकों ने बताया कि पिछले चार वर्षों से नोशनल इंक्रीमेंट तथा मेडिकल कॉलेज में डीएसीपी के तहत प्रमोशन को अन्यायपूर्ण तरीके से रोका जा रहा है, जिसके कारण विश्वविद्यालय के शिक्षक गण दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इससे न केवल उनके कैरियर को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है, बल्कि उनके परिवारों पर भी गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट आ पड़ा है।
शिक्षकों ने कहा कि यदि शीघ्र न्याय नहीं किया गया तो वे प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रेस विज्ञप्ति देंगे तथा लोकतांत्रिक तरीके से क्रमबद्ध विरोध प्रदर्शन करेंगे। देर शाम तक शिक्षक केंद्रीय कार्यालय में जमे थे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

