विश्व तंबाकू निषेध दिवस : बीएचयू में जागरूकता कार्यक्रम, मनोचिकित्सा विभाग में उन्नत सुविधाओं का उद्घाटन
वाराणसी, 30 मई (हि.स.)। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी तथा ‘इम्पॉर्टिंग हेल्थ एजुकेशन टू कम्युनिटी’ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
इस अवसर पर “अनमास्किंग द अपील : काउंटरिंग निकोटीन एंड टोबैको एडिक्शन” विषय पर विशेषज्ञों ने विचार व्यक्त करते हुए तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि तंबाकू निषेध जैसे विषयों पर केवल औपचारिक आयोजन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर स्कूली विद्यार्थियों और युवाओं के बीच निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धूम्रपान और चबाने वाले तंबाकू दोनों ही गंभीर बीमारियों, विशेषकर कैंसर, के प्रमुख कारण हैं। कुलपति ने कहा कि तनाव, चिंता अथवा भावनात्मक दबाव से अस्थायी राहत पाने के लिए कई लोग तंबाकू का सहारा लेते हैं, लेकिन यह आदत दीर्घकाल में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक साबित होती है। उन्होंने तंबाकू नियंत्रण के लिए सामुदायिक सहभागिता आधारित व्यापक रणनीति अपनाने की वकालत करते हुए “तंबाकू छोड़ो अभियान” शुरू करने का सुझाव दिया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण मनोचिकित्सा विभाग में स्थापित अत्याधुनिक नैदानिक एवं उपचारात्मक सुविधाओं का उद्घाटन रहा। इनमें क्वांटिटेटिव इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी (क्यूईईजी), स्लीप लेबोरेटरी (पॉलीसोमनोग्राफी), इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ईसीटी), ट्रांसक्रैनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (टीडीसीएस), रिपीटेटिव ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (आरटीएमएस) तथा डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, क्यूईईजी सुविधा मस्तिष्कीय गतिविधियों के सटीक आकलन और विभिन्न न्यूरो-मनोरोग संबंधी विकारों के निदान एवं निगरानी में सहायक होगी। वहीं, स्लीप लेबोरेटरी के माध्यम से नींद संबंधी विकारों का व्यापक मूल्यांकन और उपचार संभव हो सकेगा। उन्नत ईसीटी सुविधा गंभीर मानसिक रोगों के लिए सुरक्षित एवं प्रमाण-आधारित उपचार उपलब्ध कराएगी।
इसके अतिरिक्त, टीडीसीएस और आरटीएमएस जैसी गैर-आक्रामक मस्तिष्क उत्तेजना तकनीकें अवसाद, चिंता विकार, ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) तथा अन्य न्यूरो-मनोरोग स्थितियों के उपचार में नई संभावनाएं प्रदान करेंगी। इन सुविधाओं से रोगी सेवाओं के साथ-साथ नैदानिक अनुसंधान और शैक्षणिक प्रशिक्षण को भी गति मिलेगी।
विशिष्ट अतिथि एवं चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. शंखवार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा रोगी देखभाल के क्षेत्र में मनोचिकित्सा विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन ही व्यक्ति की सफलता और समग्र विकास का आधार है।
चिकित्सा संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने धूम्ररहित तंबाकू के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में यह चुनौती अक्सर धूम्रपान की तुलना में कम चर्चा में रहती है। उन्होंने बताया कि जहां धूम्रपान करने वालों की संख्या लगभग 10 प्रतिशत है, वहीं चबाने वाले और अन्य धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का उपयोग करने वालों की संख्या लगभग 20 प्रतिशत है। कार्यक्रम में प्रतिभागियों का स्वागत मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष एवं आयोजन सचिव प्रो. अच्युत कुमार पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर दंत विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. एच. सी. बरनवाल तथा मानसिक चिकित्सालय वाराणसी के निदेशक प्रो. सी. पी. मल्ल सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

