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वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद स्थापित कर शोध एवं ज्ञान के नए आयाम विकसित करने की आवश्यकता : प्रो. अजित चतुर्वेदी

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वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद स्थापित कर शोध एवं ज्ञान के नए आयाम विकसित करने की आवश्यकता : प्रो. अजित चतुर्वेदी


वाराणसी,28 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू)के वैदिक विज्ञान केंद्र की ओर से वैदिक ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से बुधवार को ‘वैदिक वाङ्मय में विज्ञान के आधारभूत सिद्धांत’ विषयक व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ प्रो. बी. के. पांडेय तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के नासिक परिसर के वेद, पौरोहित्य एवं कर्मकांड विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार मिश्र ने व्याख्यान प्रस्तुत किए।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने ‘वेद-विज्ञान व्याख्यानमाला’ की सराहना करते हुए इसे एक बहुत अच्छी पहल बताया। उन्होंने कहा कि वैदिक विज्ञान केंद्र के माध्यम से वैदिक ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। कुलपति ने सुझाव दिया कि विद्वानों के व्याख्यानों की रिकॉर्डिंग कर उन्हें यूट्यूब जैसे डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि युवा पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ सके और इन व्याख्यानों से लाभान्वित हो सके। कता है।

वैदिक वाङ्मय में वैज्ञानिक अवधारणाओं पर चर्चा

मुख्य वक्ता प्रो. बी. के. पांडेय ने विज्ञान, ज्ञान और वैदिक वाङ्मय के पारस्परिक संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने वैदिक साहित्य में निहित वैज्ञानिक अवधारणाओं को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रो. पांडेय ने कहा कि वैदिक ज्ञान परंपरा का अध्ययन उसके मूल संदर्भों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने ज्ञान की अवधारणाओं तथा संस्कृत की धातुओं और शब्दों के माध्यम से विज्ञान के अर्थ को समझाते हुए वैदिक साहित्य के अध्ययन में भाषाई, दार्शनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया।

वैदिक साहित्य की व्यापकता और समग्रता पर विमर्श

वक्ता प्रो. मनोज कुमार मिश्र ने वैदिक साहित्य की विशिष्टता, व्यापकता और समग्रता पर विचार रखे। सारस्वत संरक्षक प्रो. रामचन्द्र पांडेय ने वैदिक गणितीय प्रक्रिया और खगोलीय विज्ञान से संबंधित विषयों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के आरंभ में वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. विनय कुमार पांडेय ने स्वागत भाषण दिया तथा व्याख्यानमाला के उद्देश्यों और केंद्र की गतिविधियों से परिचित कराया। संचालन डॉ. धीरज कुमार मिश्र और प्रो. विनय कुमार पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी