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बीएचयू केंद्रीय कार्यालय के कर्मचारियों को सिखाए गए जीवन रक्षा के कौशल

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बीएचयू केंद्रीय कार्यालय के कर्मचारियों को सिखाए गए जीवन रक्षा के कौशल


—हमारा विश्वविद्यालय परिवार आपातकालीन स्थिति से निपटने में सक्षम हो सके,प्रयास :कुलपति

वाराणसी, 20 मई (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में शुरू की गई एक अनूठी पहल के तहत बुधवार को विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के सभी कर्मचारियों को आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षण का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) के निदेशक प्रो.एस एन संखवार ने बताया कि पिछले दिनों हुई कुछ घटनाओं को ध्यान में रखते हुए एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर मंजरी मिश्रा के नेतृत्व में कुलपति प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी को एक प्रस्ताव सौंपा गया था। जिसमें विश्वविद्यालय के सभी स्तर के कर्मचारियों, शिक्षकों तथा छात्रों को आपातकालीन जीवन रक्षक के प्रशिक्षण दिया जाना था। जिसे कुलपति ने स्वीकृत किया और उसी के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

मेडिसिन संकाय प्रमुख प्रो संजय गुप्ता ने कहा कि विषय की गम्भीरता को देखते हुए हमने सबसे पहले विश्वविद्यालय परिवार को आपातकालीन जीवनरक्षण का प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया। इस कार्यक्रम की समन्वयक प्रोफेसर मंजरी मिश्रा ने बताया कि यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 18, 19 और 20 मई को केंद्रीय कार्यालय के समिति कक्ष नंबर एक में आयोजित किया गया। जिसमें पहले दिन ग्रुप ए के सभी कर्मचारी, दूसरे दिन लिपिक संपर्क के सभी कर्मचारियों और तीसरे दिन ग्रुप डी के सभी कर्मचारियों को आपातकालीन जीवनरक्षण के गुण सिखाए गए। इसमें सर्जरी विभाग के प्रोफेसर शशि प्रकाश मिश्र ने सड़क दुर्घटना में घायल मरीज की आरंभिक देखभाल और उसको सही तरीके से अस्पताल पहुंचाने के गुण सिखाए।

न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर आर एन चौरसिया ने पक्षाघात (लकवा) के मरीजों के पहचान और उनके आरंभिक इलाज के गुण सिखाए। न्यूरो सर्जरी विभाग की डॉ शुभी दुबे ने हृदय गति रुक जाने के आरंभिक लक्षण तथा उनसे संबंधित उपचार और मरीज को अस्पताल पहुंचाने के संबंधित जानकारी दी और प्रोफेसर मंजरी मिश्रा ने कार्डियक अरेस्ट सिचुएशन को हैंडल करने और चेस्ट कंप्रेशन देने के गुण सिखाए। तीनों दिन कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों को हैंड्स आन ट्रेनिंग भी दी गई। जिससे वह चेस्ट कंप्रेशन की विधि से पारंगत हो सके।

डॉ मंजरी मिश्रा ने बताया कि पहले दिन 20 से 25 प्रतिभागी, दूसरे दिन करीब 125 और तीसरे दिन 125 प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि अभी तक 04 छात्रावासों, 02 विभागों तथा बरकछा स्थित विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर में इस कार्यक्रम का आयोजन कराया जा चुका है और निकट भविष्य में भी प्रयास है कि इस कार्यक्रम को विश्वविद्यालय परिवार में सभी स्तरों पर आयोजित कराया जाएगा। जिससे हमारा विश्वविद्यालय परिवार आपातकालीन स्थिति से निपटने में सक्षम हो सके।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी