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वाराणसी: बीएचयू विधि संकाय ने हासिल की शानदार राष्ट्रीय रैंकिंग,सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में भी मिली विशेष पहचान

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वाराणसी: बीएचयू विधि संकाय ने हासिल की शानदार राष्ट्रीय रैंकिंग,सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में भी मिली विशेष पहचान


वाराणसी, 26 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विधि संकाय ने कानूनी शिक्षा, शोध और प्रो-बोनो कानूनी सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2026 की विभिन्न राष्ट्रीय रैंकिंग में विधि संकाय ने देश के प्रमुख विधि संस्थानों में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक रिपोर्ट में भी संकाय के ऐतिहासिक क्लिनिकल लीगल एजुकेशन और कानूनी सहायता कार्यों को विशेष पहचान मिली है।

—इंडिया टुडे सर्वे में वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में अव्वल

बुधवार को बीएचयू के जनसम्पर्क कार्यालय ने बताया कि इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026 में विधि संकाय ने देश के 10 सर्वश्रेष्ठ वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों की सूची में पहला स्थान हासिल किया। संकाय का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (आरओआई) स्कोर 78.53 रहा। सभी विधि संस्थानों की समग्र रैंकिंग में संकाय 1428.1 के कंपोजिट स्कोर के साथ 13वें स्थान पर रहा।

—द वीक-हंसा रिसर्च सर्वे में आठवीं रैंक

विधि संकाय ने द वीक-हंसा रिसर्च सर्वे 2026 में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में आठवां स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि बीएचयू की विश्वविद्यालय स्तर की राष्ट्रीय रैंकिंग में तीसरी प्रमुख रैंकिंग के साथ सामने आई है।

—आउटलुक और आईआईआरएफ रैंकिंग में भी मजबूत प्रदर्शन

आउटलुक सर्वे 2026 में बीएचयू के विधि संकाय को देशभर में 11वीं रैंक मिली। वहीं, आईआईआरएफ लॉ रैंकिंग 2026 में संकाय ने भारत में 13वां और उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया। आईआईआरएफ में संकाय का कुल इंडेक्स स्कोर 70.84 रहा।

—सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में बीएचयू के क्लिनिकल लॉ मॉडल का उल्लेख

राष्ट्रीय रैंकिंग के अलावा विधि संकाय के ऐतिहासिक योगदान को सुप्रीम कोर्ट की सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग की अक्टूबर 2024 की रिपोर्ट लीगल एड थ्रू लॉ स्कूल्स: ए रिपोर्ट ऑन वर्किंग ऑफ लीगल एड सेल्स इन इंडिया में भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू ने 1970 के दशक की शुरुआत में क्लिनिकल लीगल एजुकेशन के शुरुआती पाठ्यक्रमों में से एक शुरू किया था। इसके तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में क्लिनिक आधारित कानूनी सहायता, न्यायालयों के भ्रमण और अधिवक्ताओं के साथ इंटर्नशिप जैसी गतिविधियों को जोड़ा गया था।

—कानूनी सहायता के जरिए न्याय तक पहुंच का मॉडल

रिपोर्ट में विधि संकाय के लगातार प्रभाव का उल्लेख करते हुए वर्ष 2017 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में लीगल एड एंड सर्विसेज क्लिनिक द्वारा दायर क्रिमिनल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) का भी जिक्र किया गया है। इस पहल के माध्यम से कैदियों की दिहाड़ी बढ़ाने और जेलों में भीड़ कम करने के लिए अतिरिक्त सुधार गृहों की आवश्यकता जैसे मुद्दे उठाए गए थे।

—विरासत को आधुनिक जरूरतों से जोड़ने पर जोर

इन उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विधि संकाय के प्रमुख एवं डीन प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि बीएचयू लॉ स्कूल अपनी गौरवशाली विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में संकाय का फोकस बुनियादी ढांचे के व्यापक आधुनिकीकरण, अत्याधुनिक कानूनी शोध को बढ़ावा देने, उद्योग और न्यायपालिका के साथ साझेदारी मजबूत करने तथा छात्रों की प्रो-बोनो कानूनी सेवा पहलों को पुनः सक्रिय करने पर रहेगा।

—कानूनी शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार भी प्राथमिकता

प्रो.प्रदीप कुमार सिंह के अनुसार,राष्ट्रीय रैंकिंग में लगातार बेहतर प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में मिली पहचान से बीएचयू विधि संकाय की शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ-साथ न्याय तक पहुंच और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उसकी भूमिका भी रेखांकित हुई है। संकाय अब अपनी ऐतिहासिक क्लिनिकल लीगल एजुकेशन की परंपरा को आधुनिक शोध, तकनीक और व्यावहारिक कानूनी प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी