बनारस स्वयं एक खुला चित्र और साहित्य,जो हर पल अपनी कहानी कहता है: व्योमेश
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता,विद्यार्थियों को फोटोग्राफी की नई तकनीक बताई गई
वाराणसी,20 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में विश्व फोटोग्राफी दिवस पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के व्यवहारिक कला विभाग (कला संकाय) में आयोजित चार दिवसीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता के तीसरे दिन गुरूवार को विद्यार्थियों को नई तकनीक सिखाई गई।
प्रतियोगिता में वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्रवाल और फोटोग्राफर मनीष खत्री ने विद्यार्थियों को फोटोग्राफी की नई तकनीकों, एआई और बनारस की दृश्य संस्कृति से परिचित कराया। कार्यक्रम
के दौरान फोटोग्राफी की बदलती तकनीक और क्रिएटिविटी पर अमिताभ अग्रवाल ने विशेष व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि आज फोटोग्राफी केवल कैमरे से तस्वीर खींचने तक सीमित नहीं रह गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मिररलेस कैमरा, डिजिटल प्रोसेसिंग और आधुनिक फोटोग्राफी सॉफ्टवेयर ने इसके स्वरूप और संभावनाओं को काफी व्यापक बनाया है।
विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष अरोड़ा ने फोटोग्राफी को भारतीय आध्यात्मिक दृष्टि से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक फोटोग्राफर को अपनी फोटोग्राफिक दृष्टि की तुलना बाबा भोलेनाथ की तीसरी आँख से करनी चाहिए। जब कोई फोटोग्राफर किसी दृश्य, वस्तु या मूवमेंट को कैमरे या मोबाइल से क्लिक करने के लिए देखता है, तो वह केवल कैमरा नहीं देख रहा होता, बल्कि उसकी अपनी दृष्टि, अनुभव और संवेदना उस क्षण को चुन रही होती है। उन्होंने इसी रचनात्मक दृष्टि को फोटोग्राफर की “तीसरी आँख” की संज्ञा दी।
कार्यक्रम में नगर के साहित्यकार व्योमेश शुक्ला ने कहा कि साहित्य और चित्र एक-दूसरे के पूरक हैं और बनारस इसका सबसे जीवंत उदाहरण है। बनारस स्वयं एक खुला हुआ चित्र और खुला हुआ साहित्य है, जहाँ हर प्रकार की रचनात्मकता को आमंत्रण मिलता है। यहाँ की गलियाँ, घाट, मंदिर, लोग, जीवन-शैली, उत्सव, मृत्यु, संगीत, आध्यात्मिकता और रोजमर्रा का जीवन—सब कुछ निरंतर अपनी कहानी कहता रहता है। बनारस को देखने वाला हर व्यक्ति अपने अनुभव और दृष्टि के अनुसार एक अलग बनारस खोज सकता है।
उन्होंने कहा कि जिंदगी के ग़मों की कहानी को अच्छे ढंग से प्रदर्शित करने और कहने का नाम ही फोटोग्राफी है। एक अच्छा चित्र केवल दृश्य को नहीं दिखाता, बल्कि उसके पीछे छिपी पूरी कहानी, संवेदना और जीवन के अंतरद्वंद्व को भी सामने लाता है। प्रतियोगिता के इस विशेष कार्यक्रम में विभाग के सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और तीनों विशेषज्ञों के व्याख्यान एवं संवाद सत्रों का लाभ उठाया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने फोटोग्राफ दिखाए, विशेषज्ञों से प्रश्न पूछे तथा फोटोग्राफी की तकनीकी और रचनात्मक संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम के संयोजक कृष्णा सिंह ने आयोजन के विभिन्न चरणों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. आशीष कुमार गुप्ता एवं असिस्टेंट प्रोफेसर सृष्टि प्रजापति ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस प्रतियोगिता का समापन शुक्रवार 21 अगस्त को होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

