वैदिक ज्ञान भारत की अमूल्य धरोहर, संरक्षण हम सभी का दायित्व : केशव मौर्य
- 500 बटुकों और देशभर से आए विद्वान-आचार्यों ने निकाली वैदिक संदेश यात्रा
मीरजापुर, 13 सितंबर (हि.स.)। मां विंध्यवासिनी धाम में रविवार को पहली बार आयोजित ऐतिहासिक वैदिक संदेश यात्रा भव्यता के साथ संपन्न हुई। करीब 500 बटुकों और विभिन्न प्रांतों से आए विद्वान-आचार्यों ने यात्रा के माध्यम से वैदिक संस्कृति, परंपरा और ज्ञान के संरक्षण का संदेश दिया। मां विंध्यवासिनी मंदिर से सुबह शुरू हुई यात्रा पुरानी वीआईपी मार्ग, राम-जानकी मंदिर, स्टेट बैंक चौराहा, बावली चौराहा और बंगाली चौराहा होते हुए विंध्य रेजिडेंसी पहुंची। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।
मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वेदों में निहित ज्ञान भारत की अमूल्य धरोहर है। इसका संरक्षण और संवर्धन हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि वेद पाठशाला में शिक्षा प्राप्त करने वाला प्रत्येक बटुक लोक कल्याण की भावना के साथ आगे बढ़ता है। वेदों की गूंज अनंत काल तक भारत भूमि पर सुनाई देती रहेगी।
उन्होंने बताया कि उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान से देशभर के करीब 100 वेद विद्यालय जुड़े हैं। कई स्थानों पर नए विद्यालय भी शुरू हुए हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार वैदिक संस्कृति तथा धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए कार्य कर रही है।
मौर्य ने कहा कि विंध्याचल आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मां विंध्यवासिनी और अष्टभुजा देवी की पौराणिक परंपरा इस क्षेत्र को विशिष्ट बनाती है। विंध्यधाम में श्रद्धालुओं की सुविधाओं में भी लगातार सुधार किया जा रहा है।
उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि आज श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था और सुविधाएं मिल रही हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. विरुपाक्ष वी. जद्दीपाल ने की। इस दौरान पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल, नगर विधायक पंडित रत्नाकर मिश्र, एमएलसी विनीत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर सरोज, नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी समेत अन्य अतिथि मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

