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मीरजापुर : नल सूखे, नाला बना सहारा, पहाड़ी पानी से बुझ रही प्यास

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मीरजापुर : नल सूखे, नाला बना सहारा, पहाड़ी पानी से बुझ रही प्यास


मीरजापुर, 11 जुलाई (हि.स.)। सरकार की 'हर घर नल' योजना का दावा जिगना क्षेत्र के कामापुर कला गांव की मुसहर और आदिवासी बस्ती में दम तोड़ता नजर आ रहा है। यहां घरों तक नल तो पहुंच गए, लेकिन उनमें पानी नहीं। मजबूरी में ग्रामीण और मासूम बच्चे बस्ती से सटे पहाड़ी नाले का पानी पीने और भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

शनिवार को नाले से पानी भर रहे बच्चों ने बताया कि प्यास बुझाने के लिए उनके पास यही एकमात्र सहारा है, जबकि कुछ ही दूरी पर लगे सरकारी नलों की टोटियां महीनों से सूखी पड़ी हैं। ग्रामीण पान कुमारी, जड़ावती, चमेली देवी और हीरावती ने बताया कि डिहवा मजरा में ओवरहेड टैंक बना है, लेकिन बस्ती में कहीं नल नहीं लगाए गए और जहां लगाए भी गए हैं, वहां सप्ताह में सिर्फ एक दिन बूंद-बूंद पानी टपकता है।

ग्राम प्रधान पूजा विश्वकर्मा ने बताया कि जल जीवन मिशन के अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। वहीं बीडीओ रामपाल ने भी माना कि जल जीवन मिशन के अधिकारियों की लापरवाही के कारण शिकायतों का अंबार लगा है।

ग्रामीणों का कहना है कि दूषित नाले का पानी पीने से कभी भी संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं। उनका सवाल है कि जब नलों में पानी ही नहीं, तो आखिर 'हर घर नल' योजना का लाभ उन्हें कब मिलेगा?

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा