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राम कथा मर्यादा में जीवन जीने की कला सिखाती है : पं. विष्णुधर द्विवेदी

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राम कथा मर्यादा में जीवन जीने की कला सिखाती है : पं. विष्णुधर द्विवेदी


मीरजापुर, 07 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर के जिगना क्षेत्र के परमानपुर गांव स्थित गंगा तट पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को कथा व्यास पं. विष्णुधर द्विवेदी ने भगवान राम और श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब गए।

कथा व्यास ने कहा कि भगवान राम का प्राकट्य खीर से हुआ था। खीर चावल, दूध, चीनी और अग्नि से बनती है। इसमें चावल परिश्रम, दूध विशुद्ध ज्ञान, चीनी प्रेम और अग्नि तप का प्रतीक है। प्रभु को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को परिश्रम, ज्ञान, प्रेम और तप की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि न तो सूर्पणखा को राम मिले और न ही रावण को सीता मिली। राम कथा पूरी दुनिया को मर्यादा में रहकर जीवन यापन करने की सीख देती है। रामचरितमानस भारतीय जनमानस की जीवन रेखा है। भगवान राम ने 14 वर्षों में रावण का वध किया, लेकिन रावण द्वारा फैलाई गई कुरीतियों को समाप्त करने में 11 हजार वर्ष लगे। जब हर व्यक्ति के मन में प्रेम का भाव जागृत होगा, तभी रामराज्य की कल्पना साकार होगी।

भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक भगवान श्रीकृष्ण कारागार में रहे, तब तक संसार आनंद से वंचित रहा। जैसे ही भगवान गोकुल पहुंचे, आनंद की वर्षा होने लगी। कथा में यजमान रामनिवास पांडेय, जय देवी, कमलेश पांडेय, पप्पू, सुरेश, सुधीर, सुनील, सुजीत, दिव्यांश, निधि, लाल साहब, महेंद्र देव, श्रीकांत, आशीष, राधे, पीयूष और दिलीप सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा