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भारत की सांस्कृतिक विविधता ही राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी शक्ति: प्रो. बिहारी लाल शर्मा

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भारत की सांस्कृतिक विविधता ही राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी शक्ति: प्रो. बिहारी लाल शर्मा


सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में मनाया गया छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस, लोकसंस्कृति की दिखी झलक

वाराणसी, 01 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में स्थित सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस हर्षोल्लास एवं सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय के योगसाधना केंद्र में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता की मनोहारी झलक प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने लोकगीतों, भाषणों और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को जीवंत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक एवं पौराणिक मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन तथा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा परिसर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण से सराबोर हो उठा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा, जनजातीय संस्कृति, लोकजीवन और ऐतिहासिक विरासत पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ के लोकगीतों एवं सांस्कृतिक धुनों की प्रस्तुति के साथ राज्य की परंपराओं, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक विशेषताओं पर अपने विचार भी व्यक्त किए।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि प्रत्येक राज्य की भाषा, परंपरा और संस्कृति का सम्मान ही श्रेष्ठ भारत की वास्तविक पहचान है। भारत की शक्ति उसकी सांस्कृतिक विविधता, समृद्ध परंपराओं, भाषाओं और राष्ट्रीय एकात्मता में निहित है। देश के प्रत्येक राज्य की भाषा, लोकाचार, सामाजिक मान्यताओं और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि किसी राज्य का गठन केवल भौगोलिक सीमाओं का निर्धारण नहीं, बल्कि उस क्षेत्र की विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने का अवसर भी होता है। छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वहां की विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और समृद्ध परंपराओं के संरक्षण एवं विकास के साथ राष्ट्रीय प्रगति में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की भावना का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत को समझने और आत्मसात करने का आह्वान करते हुए कहा कि पारस्परिक सम्मान, सद्भाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता का सूत्र और मजबूत होगा।

इससे पूर्व कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं छात्र कल्याण संकाय प्रमुख प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को राज्य की समृद्ध विरासत और विशिष्ट लोकपरंपराओं से परिचित कराया।

नैतिकता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से बनेगा श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत

कार्यक्रम के अंतर्गत सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 के क्रम में ‘सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र’ एवं ‘श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत’ विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार शाही ने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि केवल आर्थिक विकास से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए नागरिकों का नैतिक चरित्र, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्रत्येक नागरिक को भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता का भाव रखते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने आचरण का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जागरूक, नैतिक और जिम्मेदार नागरिक ही सुरक्षित, सशक्त एवं समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति के निर्देशानुसार 31 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रदेशों के स्थापना दिवस समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस समारोह ने सांस्कृतिक विविधता के सम्मान, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और विद्यार्थियों की रचनात्मक सहभागिता का संदेश दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी