कानपुर में दशहरे पर खुला दशानन मंदिर, श्रद्धालुओं ने की रावण की पूजा
कानपुर, 20 अक्टूबर (हि.स.)। देशभर में विजयादशमी पर रावण दहन की परंपरा निभाई जा रही है। वहीं कानपुर के शिवाला स्थित दशानन मंदिर में रावण की आराधना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। साल में केवल एक बार दशहरे के दिन खुलने वाले इस मंदिर में सुबह विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने रावण की प्रतिमा पर दूध, दही और घी से अभिषेक कर तेल के दीपक जलाए और मनोकामनाएं मांगीं। शाम को मंदिर के कपाट एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
शिवाला क्षेत्र में स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है। जहां विजयादशमी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण के पुतलों का दहन किया जाता है। वहीं यहां उन्हें शक्ति का प्रतीक और प्रकांड विद्वान मानकर पूजा जाता है। मान्यता है कि रावण भगवान शिव का परम भक्त होने के साथ ही शास्त्रों का गहरा ज्ञाता था। इसी वजह से श्रद्धालु उसकी आराधना कर बल, बुद्धि और विद्या प्राप्त करने की कामना करते हैं।
परंपरा के अनुसार, दशहरे की सुबह मंदिर के कपाट खोले जाने के बाद रावण की प्रतिमा का शृंगार किया गया। इसके बाद पूजा और आरती हुई। श्रद्धालुओं ने सरसों के तेल के दीपक जलाए और पीले फूल अर्पित किए। मंदिर में पहले मां छिन्नमस्तिका की पूजा की जाती है। फिर दशानन की आरती होती है। शाम को मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे और श्रद्धालुओं को अगले विजयादशमी तक दर्शन के लिए इंतजार करना होगा।
मंदिर के पुजारी राम बाजपेयी ने मंगलवार को बताया कि संवत 1868 में तत्कालीन राजा ने मां छिन्नमस्तिका का मंदिर बनवाया था। इसके साथ ही रावण की करीब पांच फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित कराई गई थी। इसे देवी के प्रहरी के रूप में स्थापित किए जाने की मान्यता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रावण देवी आराधना भी करता था और भगवान शिव का अनन्य भक्त था। इसी कारण यहां दशहरे पर उसकी पूजा की विशेष परंपरा चली आ रही है।
श्रद्धालु दीपिका ने बताया कि दशानन मंदिर की परंपरा अन्य स्थानों से अलग है। यहां रावण की विद्वता और ज्ञान को याद करते हुए पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि वह मंदिर में दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मकता की कामना करने आई हैं।
वहीं श्रद्धालु राजू ने बताया कि रावण के पांडित्य और ज्ञान से जुड़ी मान्यताओं के कारण वह यहां दर्शन करने पहुंचे हैं। उनके मुताबिक, दशहरे पर इस मंदिर में पूजा करने का अनुभव अलग होता है। यहां श्रद्धालु रावण की विद्वता से प्रेरणा लेते हुए बल, बुद्धि और ज्ञान की कामना करते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

