वैज्ञानिक और निष्पक्ष विवेचना ही प्रभावी न्याय व्यवस्था की आधारशिला : अरुण कुमार सिंह देशवाल
प्रयागराज में 1,150 पुलिस विवेचकों को मिलेगा फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य और नए आपराधिक कानूनों का प्रशिक्षण
प्रयागराज, 27 जुलाई (हि.स.)। वैज्ञानिक, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण विवेचना ही प्रभावी न्याय व्यवस्था की आधारशिला है। यह बातें सोमवार को प्रयागराज पुलिस और मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित स्किल एन्हांसमेंट वर्कशॉप ऑफ पुलिस इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर्स इन मेडिको-लीगल केसेज के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहीं।
उन्होंने कहा कि विवेचना जितनी तथ्यपरक और विधिसम्मत होगी, न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्य उतने ही अधिक विश्वसनीय होंगे और दोषियों को सजा दिलाने के साथ निर्दोषों के अधिकारों की भी रक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने विवेचकों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और आधुनिक तकनीकों को अपने दैनिक कार्य में अपनाने का आह्वान किया।
न्यायमूर्ति देशवाल सोमवार को मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज में प्रयागराज पुलिस और मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित स्किल एन्हांसमेंट वर्कशॉप ऑफ पुलिस इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर्स इन मेडिको-लीगल केसेज के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
पाँच दिवसीय यह कार्यशाला 27 से 31 जुलाई तक आयोजित की जा रही है। इसमें प्रतिदिन लगभग 230 विवेचकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रकार कुल 1,150 पुलिस अधिकारियों और विवेचकों को नए आपराधिक कानूनों, फॉरेंसिक विज्ञान, डिजिटल साक्ष्यों और आधुनिक विवेचना तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार ने कहा कि पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज का लक्ष्य प्रत्येक विवेचना को निष्पक्ष, पारदर्शी, समयबद्ध, वैज्ञानिक और उच्च गुणवत्ता वाला बनाना है।
उन्होंने कहा कि बदलते अपराध स्वरूप और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए विवेचकों का लगातार प्रशिक्षण आवश्यक है। इससे न केवल अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि प्रभावी अभियोजन और दोषसिद्धि दर में भी सुधार होगा।
कार्यशाला का उद्देश्य विवेचकों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के प्रावधानों की व्यावहारिक जानकारी देना है। इसके साथ ही उन्हें फॉरेंसिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग, घटनास्थल प्रबंधन, डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण, केस डायरी लेखन और मजबूत आरोप-पत्र तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ नवीन आपराधिक कानूनों, साइबर अपराध, फॉरेंसिक विज्ञान, महिला एवं बाल अपराधों की संवेदनशील विवेचना, चिकित्सकीय साक्ष्य, न्यायालयीन प्रक्रिया और प्रभावी अभियोजन जैसे विषयों पर व्याख्यान देंगे। साथ ही प्रतिभागियों को केस स्टडी, संवादात्मक सत्र और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों से भी अवगत कराया जाएगा।
कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) वी.बी. सहाय, राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ के निदेशक प्रो. (डॉ.) ए.के. वर्मा, आयोजन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) आदर्श कुमार, प्रो. (डॉ.) अर्चना कौल, डॉ. राजेश कुमार राय सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

