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युवा संस्कार बचायें, तभी बचेगी संस्कृति: देवकीनंदन महाराज

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युवा संस्कार बचायें, तभी बचेगी संस्कृति: देवकीनंदन महाराज


युवा संस्कार बचायें, तभी बचेगी संस्कृति: देवकीनंदन महाराज


शिष्यों ने किया गुरूपूजन, देवकीनंदन महाराज ने दिलाया नशामुक्त जीवन का संकल्प

प्रियाकान्तजु मंदिर पर हजारों शिष्यों ने मनायी गुरू पूर्णिमा

जैन-जी ने मजबूती से अपनी बात रखी, लेकिन भाषा में मर्यादा भी याद रखें

मथुरा, 29 जुलाई(हि.स.)। वृन्दावन ठाकुर श्री प्रियाकान्तजु मंदिर पर हजारों शिष्यों ने धर्मगुरू देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज का पूजन कर प्राचीन गुरू-शिष्य परम्परा का निर्वहन किया। देवकीनंदन महाराज ने विभिन्न स्थानों से आये शिष्यों को नशामुक्त सात्विक जीवन जीने एवं धर्मानुसार सद् आचरण करने का उपदेश दिया। बुधवार देर सांय तक गुरू पूजन का क्रम चलता रहा।

छटीकरा मार्ग स्थित प्रियाकान्तजु मंदिर के शांति सेवा सभागृह में बुधवार को गुरूपुर्णिमा महोत्सव मनाया गया। प्रातः काल से ही हजारों की संख्या में शिष्य गुरूपूजन के लिये कतारों में लग गये। देवकीनंदन महाराज के मंदिर आगमन पर भव्य स्वागत किया गया। कोलकाता से आये भक्तों ने आरती उतारी। तत्पश्चात गुरू पूजन एवं आर्शीवचन कार्यक्रम आयोजित हुआ।

शिष्यों को सात्विक जीवनशैली का उपदेश करते हुये देवकीनंदन महाराज ने कहा कि धर्म के बताये मार्ग पर चल कर अपने लोक और परलोक को सुधारना चाहिये। जैन-जी के युवाओं को सम्बोधित करते हुये उन्होने कहा कि यह अच्छा है कि हम अपनी बात को पूरी मजबूती से आगे रख सकें हैं। लेकिन हमें अपनी भाषा और मर्यादा का भी ज्ञान होना चाहिये। हमें यह याद रखना चाहिये कि हम किस प्रकार से अपनी बात कह रहे है। उन्होने कहा कि अगर हमारे बच्चों में संस्कार बचेंगे तो ही सनातन बचेगा।

देवकीनंदन महाराज ने मात्भाषा हिंदी और देव भाषा संस्कृत को बढ़ावा देने की शिक्षा देते हुये कहा कि चीन भी हमारे साथ आजाद हुआ था, लेकिन उसने अपनी भाषा और संस्कृति को प्राथमिकता देकर उन्नती की। गुरू पूजन पश्चात सभी शिष्यों ने गुरू प्रसादी ग्रहण की। सांयकाल मंदिर पर पुर्णिमा संकीर्तन में भजनों का आनंद लिया।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार