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फिर गूंजेगी अखाड़े में पहलवानों की हुंकार, पारंपरिक खेलों को संवारने की तैयारी

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फिर गूंजेगी अखाड़े में पहलवानों की हुंकार, पारंपरिक खेलों को संवारने की तैयारी


मीरजापुर, 01 सितंबर (हि.स.)। विंध्य क्षेत्र की मिट्टी में कभी कुश्ती के दांव-पेच के साथ बाना-तलवार और गदा के करतबों की धूम रहती थी। बदलते समय में भले ही इन पारंपरिक खेलों की चमक कुछ फीकी पड़ी हो, लेकिन अब इन्हें फिर से नई पहचान दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। वासलीगंज स्थित किशुन प्रसाद की गली के बाबू किशुन प्रसाद अखाड़े को नए स्वरूप में विकसित करने की पहल की जा रही है।

मंगलवार को नगर पालिका अध्यक्ष श्याम केशरी अखाड़े पहुंचे। उन्होंने पारंपरिक खेलों से जुड़े खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया। इस दौरान 16 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल के सामने विंध्य की पारंपरिक कला और संस्कृति का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

कुश्ती के साथ बाना-तलवार और गदा के प्रदर्शन ने उस आयोजन में विंध्य की पुरानी खेल परंपरा की झलक पेश की थी। खिलाड़ियों के सम्मान के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि ऐसी कलाएं मीरजापुर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। इन्हें केवल अतीत की याद बनकर नहीं रहने दिया जाना चाहिए, बल्कि नई पीढ़ी को इनसे जोड़ने के प्रयास होने चाहिए।

अखाड़े को मिलेगा नया स्वरूप

नगर पालिका अध्यक्ष ने बाबू किशुन प्रसाद अखाड़े के सुंदरीकरण और विकास का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि अखाड़े को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक पहल की जाएगी, ताकि यहां पारंपरिक खेलों का अभ्यास करने वाले युवाओं को बेहतर माहौल मिल सके।

उन्होंने कहा कि मीरजापुर की पहचान केवल ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है। यहां की मिट्टी ने वर्षों से पहलवानों और पारंपरिक कला के साधकों को तैयार किया है। अखाड़ों को संरक्षण देकर इस विरासत को आगे बढ़ाया जा सकता है।

खिलाड़ियों ने भी अखाड़े के विकास की पहल का स्वागत किया। उनका कहना है कि बेहतर सुविधाएं मिलने से युवाओं का रुझान पारंपरिक खेलों की ओर बढ़ेगा और विंध्य की इन पुरानी विधाओं को प्रदेश और देश के स्तर पर नई पहचान मिल सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा