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मिलावट मुक्त भारत ही स्वस्थ भारत की बुनियाद : उज्जवल रमण सिंह

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मिलावट मुक्त भारत ही स्वस्थ भारत की बुनियाद : उज्जवल रमण सिंह


संसद में गूंजा खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा, कठोर दण्ड की मांग

प्रयागराज, 01 अप्रैल (हि.स.)। देश में बढ़ती खाद्य मिलावट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बुधवार को नई दिल्ली में लोकसभा के बजट सत्र के दौरान प्रयागराज सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने मांग किया कि मिलावट करने वालों के विरुद्ध कठोर दण्ड की व्यवस्था की जाय।

उन्होंने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि 'मिलावट मुक्त भारत' ही 'स्वस्थ भारत' की बुनियाद है। उक्त जानकारी देते हुए सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा के अनुसार सांसद ने कहा कि दूध, पनीर, खोया, सरसों का तेल, देसी घी, मसाले और यहाँ तक कि फलों में भी मिलावट का धंधा बेधड़क फल-फूल रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से फलों को पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'कैल्शियम कार्बाइड' जैसे रसायनों को सीधा जहर करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे हृदय रोग, कैंसर और मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारियाँ बढ़ रही हैं।

सांसद उज्जवल ने कहा कि जहाँ दुनिया के कई गरीब देशों में भी मिलावट पर सख्त नियंत्रण है, वहीं भारत जैसे बड़े देश में आम जनता की थाली आज भी सुरक्षित नहीं है।

सदन के माध्यम से सरकार को सुझाव देते हुए उज्ज्वल रमण सिंह ने निम्नलिखित माँगें रखीं, देश भर में ऐसे शोध केंद्र स्थापित हों जो नियमित रूप से खाद्य पदार्थों का सर्वे और सैंपलिंग करें और किसी भी शिकायत या सैंपल की जांच रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से सार्वजनिक की जाए।

सांसद उज्जवल ने कहा कि मिलावट के दोषियों को कम से कम 10 वर्ष की सख्त सजा का प्रावधान हो ताकि यह समाज में एक कड़ा संदेश दे सके।

जब तक सख्त कानून, त्वरित जांच और कठोर सजा का तालमेल नहीं होगा, तब तक मिलावटखोरी को रोकना संभव नहीं है। उन्होंने स्वस्थ राष्ट्र निर्माण के लिए सरकार से इस विषय पर तुरंत और ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल