अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने लिया अवतार : बटुक महाराज
भागवत कथा में धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और नंदोत्सव, श्रद्धालुओं ने गाए बधाई गीत
प्रयागराज, 03 अक्टूबर (हि.स.)। प्राचीन श्री दधिकांदो मेला कमेटी कृष्णानगर, त्रिवेणी मार्ग कीडगंज की ओर से श्री ज्ञान पुस्तकालय के प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा व्यास पूज्य बटुक महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब भगवान धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए अवतार लेते हैं। भगवान श्रीहरि विष्णु ने भी श्रीकृष्ण के रूप में धरा पर अवतार लेकर अधर्म का नाश किया और धर्म की स्थापना की।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि धर्म और सत्य की स्थापना का संदेश देता है। श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष की शुरुआत हुई। भगवान ने अपने जीवन के माध्यम से समाज को धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कथा के दौरान इससे पूर्व वामन चरित्र और श्रीराम चरित्र का भी विस्तार से वर्णन किया गया। श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आते ही कथा स्थल पर श्रद्धालुओं में उत्साह छा गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी सजाई गई और नंदोत्सव की लीला का सांस्कृतिक आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने बधाई गीत गाकर और जयकारे लगाकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशी मनाई।
मीडिया प्रभारी राजेश केसरवानी ने बताया कि 4 अक्टूबर को कथा के दौरान गोवर्धन लीला का आयोजन किया जाएगा।
कथा के समापन पर महापौर गणेश केसरवानी, पूर्व पार्षद सविता केसरवानी, पार्षद किरण जायसवाल, मनीष केसरवानी, अजय जायसवाल, राजेश केसरवानी, बांबी, खन्ने सोनकर, अमरेश जायसवाल, कृष्णा साहू, अंकुश शर्मा, ईशू केसरवानी सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती और पूजन किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

