देश में 6000 शाखाओं की वृद्धि के साथ आरएसएस की हुई कुल 88,989 शाखाएं: डॉ मुरारजी त्रिपाठी
प्रयागराज, 17 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष में देशभर के साथ काशी प्रांत में भी संगठनात्मक विस्तार तेज़ी से हुआ है। वैचारिक स्पष्टता, सुसंगत कार्यपद्धति और समाज के साथ समन्वय के बल पर संघ की शाखाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी हरियाणा के समालखा में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में भाग लेकर लौटे प्रांत कार्यवाह मुरली पाल एवं प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ मुरारजी त्रिपाठी ने मंगलवार को पत्रकारों को दी।
उन्होंने बताया कि देश में 6000 शाखाओं की वृद्धि के साथ कुल शाखाओं की संख्या 88,989 हो गई है, जबकि काशी प्रांत में 116 शाखाएं बढ़कर कुल 2,967 शाखाएं संचालित हो रही हैं। प्रांत के सभी न्याय पंचायतों तक संघ का कार्य पहुंच चुका है। प्रस्तुत विवरण के अनुसार, काशी प्रांत के सभी 155 खंडों और 115 नगरों में संघ कार्य सक्रिय है। कुल 1504 न्याय पंचायतों में से 1438 में शाखाएं संचालित हो रही हैं, जबकि शेष में मिलन कार्यक्रम चल रहे हैं। प्रांत के 1044 बस्तियों में शाखाएं, मिलन और मंडली के माध्यम से संगठन कार्य जारी है।
--2102 हिन्दू सम्मेलन, 31 लाख से अधिक घरों में सम्पर्क
प्रांत प्रचार प्रमुख ने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान काशी प्रांत में 2102 हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए गए। घर-घर सम्पर्क अभियान के तहत स्वयंसेवकों ने 31,98,841 घरों में सम्पर्क किया। इस दौरान लगभग 2 लाख संघ साहित्य और 31,24,275 पत्रक वितरित किए गए। अभियान के लिए 16,512 टोलियों का गठन किया गया। युवाओं को जोड़ने के लिए 269 स्थानों पर 560 युवा सम्मेलन आयोजित हुए, जिनमें 53,032 विद्यार्थी और 20,342 युवा व्यवसायी शामिल हुए। इसके अतिरिक्त 240 स्थानों पर आयोजित सद्भाव बैठकों में 16,459 लोगों की भागीदारी रही।
--संत रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष पर होंगे कार्यक्रम
वक्ताओं ने बताया कि काशी की धरती से अवतरित संत शिरोमणि संत रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष पर आगामी वर्ष में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
--काशी प्रांत में होंगे दो सम्भाग
संघ की संगठनात्मक संरचना में बदलाव के तहत वर्ष 2027 से देशभर में 46 प्रांतों के स्थान पर 85 सम्भाग बनाए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत वर्तमान काशी प्रांत, जिसमें 27 जिले और 7 विभाग शामिल हैं, को दो सम्भागों में विभाजित किया जाएगा।
--अंडमान-निकोबार तक विस्तार
प्रांत प्रचार प्रमुख ने बताया कि शताब्दी वर्ष में संघ का विस्तार अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश तथा लेह लद्दाख तक हो चुका है। अंडमान के नौ द्वीपों में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में 13,000 से अधिक लोग शामिल हुए, जबकि अरुणाचल प्रदेश में 21 सम्मेलनों में 37,000 से अधिक लोगों की भागीदारी रही।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

