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कार्यालयीन कामकाज में हिंदी का प्रयोग संवैधानिक और कानूनी दायित्व : डॉ. गरिमा त्रिपाठी

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कार्यालयीन कामकाज में हिंदी का प्रयोग संवैधानिक और कानूनी दायित्व : डॉ. गरिमा त्रिपाठी


उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में राजभाषा पखवाड़े के तहत हिंदी कार्यशाला आयोजित, सरल और प्रचलित शब्दों के प्रयोग पर जोर

प्रयागराज, 23 सितंबर (हि.स.)। केंद्र सरकार के कार्यालयों में सभी कार्य हिंदी में करना संवैधानिक और कानूनी दायित्व है। उत्तर मध्य रेलवे का मुख्यालय ‘क’ क्षेत्र में आता है और यहां अधिकांश कर्मचारी हिंदी में प्रवीणता या कार्यसाधक ज्ञान रखते हैं। ऐसे में कार्यालयीन कामकाज में हिंदी के प्रयोग और निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सभी को लगातार प्रयास करना चाहिए। यह बातें उप मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं उप वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी एवं भंडार डॉ. गरिमा त्रिपाठी ने बुधवार को कहीं।

राजभाषा पखवाड़े के अवसर पर उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, सूबेदारगंज में हिंदी कार्यशाला आयोजित की गई। डॉ. गरिमा त्रिपाठी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।

उन्होंने कहा कि राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले दस्तावेजों, विभिन्न प्रकार के पत्राचार और कार्यालयीन टिप्पणियों आदि में नियमानुसार हिंदी अथवा हिंदी-अंग्रेजी के द्विभाषी रूप का प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों से कार्यालयीन व्यवहार में आम जीवन में प्रचलित और सरल शब्दों का अधिक से अधिक प्रयोग करने का आह्वान किया।

डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि भाषा ऐसी होनी चाहिए जिसे अधिकारी, कर्मचारी, यात्री, ग्राहक और आम नागरिक आसानी से समझ सकें। सरल हिंदी के प्रयोग से रेलवे की नीतियों और कार्यक्रमों की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती है और उन्हें योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी।

कार्यशाला में प्रधान आयकर आयुक्त कार्यालय, प्रयागराज के सहायक निदेशक एवं राजभाषा मकरध्वज मौर्य और पूर्व उप निदेशक एवं राजभाषा प्रकाश चंद्र मिश्र ने राजभाषा के कार्यान्वयन और राजभाषा नीति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।

उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग के संबंध में व्यावहारिक जानकारी भी साझा की।

कार्यक्रम में महाप्रबंधक कार्यालय के विभिन्न विभागों के कर्मचारी उपस्थित रहे। संचालन वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी यथार्थ पाण्डेय ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल