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मानसून में आरयूबी पर जलभराव की निगरानी होगी तेज, बीएमएस से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग : उमरे

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मानसून में आरयूबी पर जलभराव की निगरानी होगी तेज, बीएमएस से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग : उमरे


प्रयागराज, 25 जुलाई (हि.स.)। मानसून के दौरान रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) में जलभराव से होने वाली परेशानी और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उत्तर मध्य रेलवे ने विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की है। महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व में रेलवे ने ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) के जरिए आरयूबी में पानी भरने की स्थिति पर नजर रखने और तत्काल पानी निकालने की व्यवस्था को मजबूत किया है। यह जानकारी शनिवार को उमरे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने दी।

नई व्यवस्था के तहत मंडलों में एडीईएन स्तर पर मानसून व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए हैं। इनमें बारिश की स्थिति की जानकारी हर घंटे साझा की जाएगी। बारिश होने पर प्रभावित आरयूबी की जियो-टैग तस्वीरें भी तुरंत भेजी जाएंगी। सभी आरयूबी की स्थिति की दिन में दो बार निगरानी की जाएगी।

बीएमएस पर प्रत्येक आरयूबी में जलभराव की स्थिति कीरियल टाइम जानकारी दर्ज की जाएगी। पानी निकालने के बाद आरयूबी की सामान्य स्थिति की तस्वीर और जानकारी दोबारा अपलोड की जाएगी।

रेलवे ने जलभराव की गहराई के आधार पर आरयूबी को अलग-अलग श्रेणियों में रखा है।5 से 20 सेंटीमीटर तक पानी भरने पर इसे हल्का संवेदनशीलमाना जाएगा और 15 दिन में निरीक्षण किया जाएगा।20 सेंटीमीटर से अधिक जलभराव को गंभीर संवेदनशीलश्रेणी में रखा गया है, जिसकी सप्ताह में एक बार जांच होगी। वहीं50 सेंटीमीटर से अधिक पानी छह घंटे से ज्यादा समय तक रहने पर इसे गंभीर जलभरावमाना जाएगा।

30 सेंटीमीटर से अधिक पानी भरने पर आरयूबी को यातायात के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा। पानी पूरी तरह निकलने और रास्ता सुरक्षित होने के बाद ही यातायात बहाल किया जाएगा। संवेदनशील स्थानों पर चौकीदार भी तैनात किए जा रहे हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर रास्ता बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि मानसून के दौरान आरयूबी में जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बीएमएस और जियो-टैग तस्वीरों के जरिए स्थिति की जानकारी अधिकारियों तक तत्काल पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जलभराव की स्थिति में समय रहते यातायात रोककर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और पानी निकालने के बाद ही रास्ता खोला जाएगा।

रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ स्थानों पर बनेकलवर्ट केवल पानी की निकासी के लिए होते हैं। इन्हें आरयूबी या एलएचएस समझना सही नहीं है। ऐसे जलमार्गों से आम लोगों को आवागमन नहीं करना चाहिए। रेलवे का कहना है कि डिजिटल निगरानी और त्वरित कार्रवाई के जरिए मानसून में यात्रियों की सुरक्षा और सुगम यातायात सुनिश्चित किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल