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शिक्षा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाना जनविरोधी, फैसला वापस ले सरकार : उज्ज्वल रमण सिंह

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शिक्षा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाना जनविरोधी, फैसला वापस ले सरकार : उज्ज्वल रमण सिंह


यूपी बोर्ड के मान्यता और संबद्धता शुल्क पर जीएसटी लगाने के निर्णय का सांसद ने किया विरोध, बोले- बढ़ेगा स्कूलों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ

प्रयागराज, 23 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा विद्यालयों की मान्यता और संबद्धता शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने के फैसले का इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने विरोध किया है। उन्होंने इस निर्णय को शिक्षा विरोधी और जनविरोधी बताते हुए प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा परिषद से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

सांसद ने कहा कि पहले से महंगाई की मार झेल रहे शिक्षण संस्थानों, विद्यालय प्रबंधकों और शिक्षकों पर मान्यता व संबद्धता शुल्क के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी का अतिरिक्त भार डालना उचित नहीं है। इसका अप्रत्यक्ष असर अभिभावकों पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय मानकर उस पर अतिरिक्त कर का बोझ डालना गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के हित में नहीं है।

उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में वित्तविहीन विद्यालय सीमित संसाधनों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में मान्यता और संबद्धता शुल्क पर जीएसटी लागू होने से इन विद्यालयों की आर्थिक स्थिति और खराब होगी। विशेषकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में नए विद्यालय खोलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे के बेहतर भविष्य की आधारशिला है। सरकार को शिक्षा को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए काम करना चाहिए, न कि शिक्षण संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना चाहिए। जीएसटी के कारण विद्यालयों का खर्च बढ़ेगा और इसका भार अंततः विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर पड़ सकता है।

सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने बताया कि सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। सांसद ने कहा कि यदि सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो वह इस विषय को संसद से लेकर सड़क तक प्रमुखता से उठाएंगे।

सांसद ने प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा परिषद से मांग की कि विद्यालयों की मान्यता और संबद्धता शुल्क पर लगाए गए 18 प्रतिशत जीएसटी के निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए और इसे वापस लिया जाए, ताकि वित्तविहीन विद्यालयों, शिक्षकों, प्रबंधकों और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल