जीआरपी ने बरामद किए 14 लाख से अधिक के गुम मोबाइल, रक्षाबंधन पर यात्रियों के चेहरे खिले
प्रयागराज, 28 अगस्त (हि.स.)। रक्षाबंधन के पर्व पर यात्रा के दौरान गुम हुए मोबाइल फोन वापस मिलने से यात्रियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। थाना जीआरपी फतेहपुर पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत विभिन्न कंपनियों के 48 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। बरामद मोबाइल की अनुमानित कीमत करीब 14 लाख 40 हजार रुपये से अधिक बताई गई है।
पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी. के मार्गदर्शन और पुलिस महानिरीक्षक रेलवे एन. कोलान्ची के निर्देशन में गुम मोबाइलों की बरामदगी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक रेलवे प्रयागराज प्रशांत वर्मा की निगरानी और पुलिस उपाधीक्षक रेलवे कानपुर शेषमणि उपाध्याय के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई।
थानाध्यक्ष जीआरपी फतेहपुर राजकुमार मौर्य के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने जीआरपी सर्विलांस सेल की तकनीकी मदद से विभिन्न स्थानों से गुम हुए 48 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए। 28 अगस्त को थाना परिसर में आयोजित मोबाइल वितरण समारोह में बरामद मोबाइल उनके वास्तविक स्वामियों को विधिवत सौंपे गए।
मोबाइल वापस मिलने पर यात्रियों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। यात्रियों ने जीआरपी फतेहपुर पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि गुम हुए मोबाइल की बरामदगी पुलिस की सतर्कता, प्रतिबद्धता और तकनीकी दक्षता का प्रमाण है। इस पहल से पुलिस के प्रति यात्रियों का विश्वास और मजबूत हुआ है।
तकनीकी दक्षता से मिली सफलता
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गुम मोबाइलों की बरामदगी में सर्विलांस तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस टीम ने लगातार प्रयास कर मोबाइल फोन को तलाशा और उन्हें उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाया। यात्रियों ने पुलिस के इस कार्य की प्रशंसा करते हुए आभार जताया।
इन पुलिसकर्मियों की रही भूमिका
मोबाइल बरामदगी अभियान में थानाध्यक्ष राजकुमार मौर्य, उपनिरीक्षक अरविंद कुमार, उपनिरीक्षक लक्ष्मण, चौकी प्रभारी जीआरपी खागा उपनिरीक्षक दिग्विजय सिंह, मुख्य आरक्षी अरुण कुमार और मुख्य आरक्षी तहसीलदार यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों की सहायता और उनकी खोई हुई वस्तुओं को वापस दिलाना जीआरपी की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऑपरेशन मुस्कान के तहत आगे भी इस तरह के अभियान जारी रहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

