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इन्फ्लुएंजा-ए के बढ़ते मामलों को लेकर एसआरएन अस्पताल सतर्क

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इन्फ्लुएंजा-ए के बढ़ते मामलों को लेकर एसआरएन अस्पताल सतर्क


इन्फ्लुएंजा-ए के बढ़ते मामलों को लेकर एसआरएन अस्पताल सतर्क


संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान से लेकर गंभीर रोगियों के उपचार तक तैयारी, दवाओं और संक्रमण नियंत्रण पर नजर

प्रयागराज, 26 अगस्त (हि.स.)। देश के कई हिस्सों में इन्फ्लुएंजा-ए ( (एचवनएनवन) , जिसे सामान्य तौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है, के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। अस्पताल प्रशासन ने फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की समय पर पहचान, आवश्यक जांच और उपचार के साथ गंभीर मरीजों के प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के संबंधित विभागों को सतर्क रहने तथा संक्रमण नियंत्रण के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. ए.के. वर्मा ने बुधवार को बताया कि देश के कुछ हिस्सों में (एचवनएनवन) के मामलों में वृद्धि को देखते हुए मेडिकल कॉलेज और एसआरएन के संबंधित विभागों को सतर्क रहने को कहा गया है। मरीजों की समय पर पहचान और उचित उपचार सबसे महत्वपूर्ण है। अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा की जा रही है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन बुखार और सांस संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक में बढ़े मामले

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 26 अगस्त तक(एचवनएनवन) के 2,308 मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र में 21 अगस्त तक 1,109 मामले दर्ज किए गए, जबकि पूरे वर्ष 2025 में राज्य में 942 मामले सामने आए थे। मुंबई में 488 और पुणे में 241 मामले रिपोर्ट किए गए हैं।

कर्नाटक में 22 अगस्त तक 32 जिलों में प्रयोगशाला जांच से पुष्टि हुए इन्फ्लुएंजा के 4,212 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में पीपीई किट, एन-95 मास्क और ओसेल्टामिविर जैसी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड के देहरादून में भी अगस्त में 49 पुष्ट (एचवनएनवन) मामले और पांच मौतें दर्ज की गई हैं। मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में भी मामले सामने आने के बाद निगरानी बढ़ाई गई है।

गंभीर मरीजों के लिए उपचार की व्यवस्था

एसआरएन अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक प्रो. डॉ. नीलम सिंह ने बताया कि फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर संदिग्ध मरीजों की जांच और गंभीर मरीजों का उपचार किया जाएगा। गंभीर श्वसन संक्रमण वाले मरीजों के लिए ऑक्सीजन, निगरानी, वेंटिलेटर और आवश्यकता के अनुसार आईसीयू व क्रिटिकल केयर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, बाल रोग, एनेस्थीसिया सहित संबंधित विभाग आपसी समन्वय से मरीजों का उपचार करेंगे। स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मास्क, हाथों की स्वच्छता और संक्रमण से बचाव के निर्धारित नियमों के पालन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ितों को अधिक सावधानी

मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मनोज माथुर ने बताया कि अधिकांश (एचवनएनवन) मरीज सामान्य उपचार से ठीक हो जाते हैं, लेकिन बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों तथा मधुमेह, हृदय, फेफड़े और गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस फूलना, ऑक्सीजन का स्तर कम होना, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना चाहिए।

ये हैं प्रमुख लक्षण

(एचवनएनवन)में अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिर दर्द, शरीर में दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।

बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान

खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें। हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से साफ करें। फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और दूसरों के निकट संपर्क को कम रखें। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाएं न लें।

नया खतरनाक स्ट्रेन नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में(एचवनएनवन) के मामलों में बढ़ोतरी मौसमी संक्रमण का हिस्सा है। ICMR के अनुसार देश में फैल रहा(एचवनएनवन) pdm09 पहले से ज्ञात मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस है और फिलहाल किसी नए खतरनाक स्ट्रेन के प्रमाण नहीं मिले हैं। ऐसे में घबराने के बजाय समय पर बीमारी की पहचान, उचित उपचार और संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाना जरूरी है।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल