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वंदे मातरम राष्ट्रीय चेतना और सेवा-समर्पण का भाव जगाने वाला गीत : डॉ. अंबरीश शर्मा

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वंदे मातरम राष्ट्रीय चेतना और सेवा-समर्पण का भाव जगाने वाला गीत : डॉ. अंबरीश शर्मा


वंदे मातरम राष्ट्रीय चेतना और सेवा-समर्पण का भाव जगाने वाला गीत : डॉ. अंबरीश शर्मा


वंदे मातरम राष्ट्रीय चेतना और सेवा-समर्पण का भाव जगाने वाला गीत : डॉ. अंबरीश शर्मा


वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर रानी रेवती देवी में ‘एक समय, एक लय, एक स्वर’ का सामूहिक गायन

प्रयागराज, 25 सितंबर (हि.स.)। वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। यह लोगों के भीतर देश के प्रति सेवा और समर्पण का भाव जागृत करता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत सेनानियों के लिए प्रेरणा उद्घोष बना। यह बात नेशनल पीजी कॉलेज, जंघई के राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अंबरीश शर्मा ने शुक्रवार को कही।

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान की ओर से संचालित ‘नमामि भारतम’ कार्यक्रम के अंतर्गत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर राजापुर स्थित रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज के सभागार में सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह के मार्गदर्शन में सुबह 11 बजे छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने ‘एक समय, एक लय, एक स्वर’ में वंदे मातरम का सस्वर गायन किया।

मुख्य अतिथि डॉ. अंबरीश शर्मा ने वंदे मातरम के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने सात नवंबर 1875 को इसकी रचना की थी। बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशवासियों और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। कांग्रेस के अधिवेशनों में भी इसका गायन किया जाता था। उन्होंने कहा कि विभिन्न परिस्थितियों और राजनीतिक विरोध के बावजूद 150 वर्ष बाद भी वंदे मातरम की यात्रा निरंतर जारी है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि विभाग के सहायक प्रोफेसर प्रो. नवीन वर्मा ने कहा कि वंदे मातरम राष्ट्रीय चेतना का स्वर है। यह मन में सेवा, समर्पण और राष्ट्रभावना को मजबूत करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस ऐतिहासिक गीत के महत्व को समझने और इसके भाव को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया।

संगीताचार्य मनोज गुप्ता के निर्देशन में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम का गायन किया। सामूहिक गायन से विद्यालय परिसर देशभक्ति के भाव से भर उठा। प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह ने कहा कि विद्यालय में वंदे मातरम का नियमित गायन होता है, लेकिन 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है।

कार्यक्रम का संचालन दिनेश कुमार शुक्ला ने किया और अतिथियों का परिचय सत्य प्रकाश पांडेय ने कराया। इस अवसर पर रमेश चंद मिश्रा, जटाशंकर मिश्रा, कामाख्या प्रसाद दुबे, शैलेश सिंह यादव, दयाशंकर गुप्ता, दीपक दयाल, प्रभात शर्मा, सुनील गुप्ता, पायल जायसवाल, पूजा मिश्रा और सत्येंद्र चौबे समेत विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल