एआई से शोध में साहित्य जुटाने से लेकर डेटा विश्लेषण तक होगा आसान : डॉ. डीके निम
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य अनुसंधान में एआई के उपयोग पर कार्यशाला, 60 शिक्षकों ने लिया हिस्सा
प्रयागराज, 25 जुलाई (हि.स.)।स्वास्थ्य अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग से शोध के लिए साहित्य जुटाने, शोध प्रोटोकॉल तैयार करने, वैज्ञानिक लेख लिखने और डेटा का विश्लेषण करने का काम आसान हो सकता है। यह जानकारी शनिवार को मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में आयोजित कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. डीके निम ने दी।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएनएमसी) में शनिवार को ‘स्वास्थ्य अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय पर संकाय विकास कार्यशाला आयोजित की गई। मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) की ओर से मेडिकल एजुकेशन यूनिट (एमईयू) सभागार में आयोजित कार्यशाला में विभिन्न विभागों के करीब 60 शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
मुख्य वक्ता डॉ. डीके निम ने बताया कि एआई की मदद से शोध कार्य को बेहतर और व्यवस्थित किया जा सकता है। इसके जरिए शोध से संबंधित सामग्री जुटाने, शोध की रूपरेखा तैयार करने, वैज्ञानिक लेख और शोध पत्र लिखने, शोध अनुदान के प्रस्ताव तैयार करने तथा आंकड़ों का विश्लेषण करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने विभिन्न एआई उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया।
प्राचार्य डॉ. ए.के. वर्मा के संरक्षण में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि चिकित्सा अनुसंधान में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसका सही और जिम्मेदारी के साथ उपयोग किया जाए तो शोध की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सकता है।
कार्यशाला का आयोजन फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर एवं एमआरयू की नोडल अधिकारी डॉ. कविता चावला के मार्गदर्शन में हुआ। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर एवं एमआरयू की सह-नोडल अधिकारी डॉ. ऋचा सिंह ने कार्यक्रम का संचालन और समन्वय किया।
प्रतिभागी शिक्षकों ने कहा कि एआई आधारित ऐसी कार्यशालाएं चिकित्सा अनुसंधान को आधुनिक बनाने और शोध कार्यों की गुणवत्ता सुधारने में उपयोगी हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

