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डिजिटल शिक्षा भविष्य की आवश्यकता, गुणवत्ता वाले ऑनलाइन पाठ्यक्रमों पर जोर : प्रो. सत्यकाम

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डिजिटल शिक्षा भविष्य की आवश्यकता, गुणवत्ता वाले ऑनलाइन पाठ्यक्रमों पर जोर : प्रो. सत्यकाम


प्रयागराज, 30 जुलाई (हि.स.)। डिजिटल शिक्षा भविष्य की आवश्यकता है और गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से उच्च शिक्षा को अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। उक्त बातें गुरुवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ऑनलाइन एजुकेशन द्वारा आयोजित 'डेवलपमेंट ऑफ मूक्स' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के सफल समापन सत्र में कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहीं।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्रा ने बताया कि 29 और 30 जुलाई को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को स्वयम (SWAYAM) के मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन पाठ्यक्रम विकसित करने का प्रशिक्षण देना था।

उन्होंने बताया कि समापन सत्र में कुलपति प्रो. सत्यकाम ने शिक्षकों से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाकर विद्यार्थियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मूक्स (MOOCs) तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम से शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है और यह भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है।

प्रो. जितेन्द्र पाण्डेय, प्रोफेसर एवं निदेशक, स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने स्वयम के मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण, क्रेडिट प्रणाली, वीडियो व्याख्यान, आमने-सामने शिक्षण, साप्ताहिक क्विज और असाइनमेंट की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला के संयोजक एवं निदेशक प्रो. ए.के. मलिक ने बताया कि विश्वविद्यालय स्वयम और स्वयम प्रभा के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्रा ने बताया कि प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला के सफल आयोजन में सह-संयोजक प्रो. ज्ञान प्रकाश यादव, डॉ. साधना श्रीवास्तव और डॉ. चन्द्रकान्त कुमार सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक, शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी और शिक्षार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल