राष्ट्र निर्माण में भूगोलवेत्ताओं की भूमिका अहम : प्रो. देवेंद्र प्रताप सिंह
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में व्याख्यान, भूमि उपयोग से लेकर नगर नियोजन तक बताया योगदान
प्रयागराज, 26 अक्टूबर (हि.स.)। भूमि उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, नगर नियोजन, कृषि, औद्योगिक विकास और ग्रामीण नियोजन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भूगोलवेत्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश के विकास और नियोजन में भूगोल विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह बात वरिष्ठ भूगोलवेत्ता एवं पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में आयोजित व्याख्यान में कही।
‘राष्ट्र निर्माण में भूगोलवेत्ताओं की भूमिका’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में प्रो. सिंह ने कहा कि देश के विभिन्न सरकारी विभागों में भूगोलवेत्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किसी भी क्षेत्र के समुचित विकास के लिए वहां की भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और जनसंख्या की आवश्यकताओं को समझना जरूरी है। भूगोल का ज्ञान विकास योजनाओं को प्रभावी बनाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद करता है।
प्रो. देवेंद्र प्रताप सिंह ‘मेकर्स ऑफ इंडियन ज्योग्राफी’ के संस्थापक हैं। उन्होंने अपने व्याख्यान में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भूगोल के व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भूगोल केवल पृथ्वी और स्थानों के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास योजनाओं के निर्माण और उनके क्रियान्वयन में भी इसकी अहम भूमिका है।
शोधार्थियों और शिक्षकों ने लिया हिस्सा
व्याख्यान में बड़ी संख्या में शोधार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के समन्वयक भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी थे। सह-समन्वयक प्रो. अश्वजीत चौधरी और समन्वयक डॉ. आरती कुमारी रहीं। कार्यक्रम का संचालन प्रो. एआर सिद्दीकी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आरती कुमारी ने प्रस्तुत किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

