सत्यनिष्ठा के बिना समृद्धि संभव नहीं, डिजिटल गवर्नेंस से भ्रष्टाचार पर लगी रोक : डॉ. विशाल विक्रम सिंह
आईआईआईटी-इलाहाबाद में ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ विषय पर तीन माह के निवारक सतर्कता अभियान का शुभारंभ
प्रयागराज, 23 सितंबर (हि.स.)। सत्यनिष्ठा के बिना वास्तविक समृद्धि संभव नहीं है। डिजिटल गवर्नेंस और सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में काफी मदद मिली है, लेकिन इस दिशा में अभी और काम करने की जरूरत है। यह बातें बुधवार को एसटीएफ, उत्तर प्रदेश पुलिस, लखनऊ के अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. विशाल विक्रम सिंह ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी)-इलाहाबाद में आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
उन्होंने छात्रों से कहा कि “आप केवल कोड नहीं लिख रहे हैं, बल्कि आने वाले भारत का भविष्य लिख रहे हैं।” आईआईआईटी-इलाहाबाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशा-निर्देशों के तहत ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ विषय पर 17 अगस्त से 16 नवंबर तक तीन माह का निवारक सतर्कता अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को प्रशासनिक भवन सभागार में अभियान का औपचारिक शुभारंभ हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. विशाल विक्रम सिंह राष्ट्रपति द्वारा वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित हैं और वर्तमान में साइबर धोखाधड़ी का पता लगाने तथा वित्तीय अपराधों की जांच से जुड़े मामलों में कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि : डिजिटल गवर्नेंस के नजरिये’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ने सरकारी योजनाओं और सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जनधन खाते, आधार, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई के माध्यम से कोरोना काल में जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने में मदद मिली। डिजिटल व्यवस्था से भ्रष्टाचार की कई संभावनाओं को कम किया जा सकता है।
डॉ. सिंह ने संस्कृत के श्लोक “सत्येन धार्यते पृथ्वी, सत्येन तपते रविः, सत्येन वाति वायुश्च, सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य केवल बोलचाल की सच्चाई नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का आधार है। उन्होंने डीपफेक, साइबर हमले और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे के प्रति छात्रों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा प्राप्त कुछ युवा कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में साइबर अपराध के रास्ते पर चले जाते हैं। इससे बचने के लिए तकनीक का सकारात्मक और जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल जरूरी है।
उन्होंने आयुष्मान कार्ड और आधार में हुए बदलावों सहित डिजिटल सेवाओं के विस्तार की जानकारी दी। साथ ही साइबर अपराध से बचाव के उपाय भी बताए। उन्होंने छात्रों को तकनीक के साथ नैतिक जिम्मेदारी को समझने की सलाह दी।
कर्तव्य के प्रति जागरूकता और पारदर्शिता से भ्रष्टाचार से मुक्ति
संस्थान के निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावणे ने कहा कि कर्तव्य के प्रति सतर्कता, जागरूकता और पारदर्शिता के साथ कार्य करने से भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने मन और मस्तिष्क पर नियंत्रण रखना होगा। लालच पर नियंत्रण न होने पर व्यक्ति जाने-अनजाने भ्रष्टाचार की ओर बढ़ सकता है।
अंशकालिक मुख्य सतर्कता अधिकारी प्रो. रजत कुमार सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रगति में बड़ी बाधा है। इसके खिलाफ जनजागरूकता के साथ सूचना प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता, प्रभावशीलता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सतर्कता व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है। सतर्कता आयोग का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करना है।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

