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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रहित की समस्याओं का समयबद्ध हाे समाधान : आलोक त्रिपाठी

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रहित की समस्याओं का समयबद्ध हाे समाधान : आलोक त्रिपाठी


सीटों में कटौती, शुल्क वृद्धि और मूलभूत सुविधाओं की कमी पर अभाविप ने जताई चिंता

प्रयागराज, 19 अगस्त (हि.स.)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सीटों में कटौती, लगातार शुल्क वृद्धि, छात्रावास शुल्क बढ़ोतरी, पेयजल एवं पुस्तकालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी, नियमित कक्षाओं का संचालन न होना और शोधार्थियों की फेलोशिप में देरी जैसी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों की समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने के लिए छात्रसंघ की बहाली भी आवश्यक है। विश्वविद्यालय प्रशासन इन सभी विषयों का समयबद्ध और स्थायी समाधान सुनिश्चित करे। यह बातें बुधवार काे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद सदस्य आलोक त्रिपाठी ने कहीं।

अभाविप ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। परिषद ने कहा कि देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल इलाहाबाद विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

परिषद ने विभिन्न विषयों में सीटों में लगातार की जा रही कटौती पर आपत्ति जताई। कहा कि इससे विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर सीमित हो रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न पाठ्यक्रमों और विषयों की फीस में लगातार वृद्धि से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को शुल्क वृद्धि के निर्णयों पर पुनर्विचार कर छात्रहित को प्राथमिकता देनी चाहिए।

अभाविप ने छात्रावास शुल्क में वृद्धि पर भी चिंता जताई। परिषद का कहना है कि दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। शुल्क बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ सकती है।

परिसर में पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध न होने को भी गंभीर समस्या बताते हुए परिषद ने सभी प्रमुख स्थानों पर नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की। साथ ही नियमित कक्षाएं संचालित करने और परीक्षाओं से पहले पाठ्यक्रम पूरा कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

पुस्तकालय के सुचारू संचालन और आवश्यक पुस्तकों की उपलब्धता पर भी अभाविप ने जोर दिया। परिषद ने कहा कि पुस्तकालय विद्यार्थियों की पढ़ाई और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसलिए विद्यार्थियों को आवश्यक पुस्तकों और अध्ययन सामग्री के लिए परेशान न होना पड़े। पुस्तकालय में पर्याप्त संख्या में नई और उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध कराने के साथ संचालन व्यवस्था को भी बेहतर किया जाए।

इकाई अध्यक्ष हिमांशु पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रहित से जुड़े कई विषय लंबे समय से लंबित हैं। सीटों में कटौती, शुल्क और छात्रावास शुल्क में वृद्धि के साथ पेयजल, पुस्तकालय, कैंटीन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, छात्रावास और चिकित्सालय की व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो अभाविप विद्यार्थियों के हित में व्यापक छात्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

काशी प्रांत सोशल मीडिया सह संयोजक समृद्धि प्रिया पाठक ने छात्राओं से जुड़ी समस्याओं को उठाते हुए कहा कि परिसर में पर्याप्त एवं स्वच्छ शौचालय, पिंक टॉयलेट और छात्रा कॉमन रूम जैसी सुविधाओं का अभाव है। महिला छात्रावासों की व्यवस्थाओं में भी सुधार की आवश्यकता है। महिला स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त दवाओं और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता सुधारने की मांग की गई।

अभाविप ने विश्वविद्यालय प्रशासन से विद्यार्थियों की सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध और स्थायी समाधान करने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल