home page

नेत्रदान की मुहिम को मिला समर्थन, 155 लोगों ने लिया संकल्प

 | 
नेत्रदान की मुहिम को मिला समर्थन, 155 लोगों ने लिया संकल्प


नेत्रदान की मुहिम को मिला समर्थन, 155 लोगों ने लिया संकल्प


नेत्रदान की मुहिम को मिला समर्थन, 155 लोगों ने लिया संकल्प


नेत्रदान पखवाड़े के आठवें दिन एसआरएन अस्पताल में चला जागरूकता अभियान, अब तक 410 लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प

प्रयागराज, 01 सितंबर (हि.स.)। नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने की मुहिम को लगातार समर्थन मिल रहा है। नेत्रदान पखवाड़े के आठवें दिन मंगलवार को मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय की टीम ने स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय में जागरूकता अभियान चलाया। अभियान के दौरान मरीजों, तीमारदारों और अन्य लोगों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी दी गई। इस दौरान 155 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया। इस प्रकार अभियान के तहत अब तक 410 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प ले चुके हैं।

अभियान का नेतृत्व प्रो. डॉ. जागृति राणा ने किया। उनके साथ डॉ. निखिल, डॉ. श्रद्धा और ऑप्टोमेट्रिस्ट की टीम ने लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया और इसके महत्व के बारे में बताया। टीम ने नेत्रदान को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों को दूर करते हुए लोगों को इसके लिए आगे आने के लिए प्रेरित किया।

चिकित्सकों ने बताया कि मृत्यु के बाद किया गया नेत्रदान किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी ला सकता है। लोगों से अपील की गई कि वे नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच अपनाएं और अपने परिवार तथा परिचितों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

अभियान को सफल बनाने में मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय के निदेशक प्रो. डॉ. संतोष कुमार और डॉ. विनोद कुमार सिंह का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

कई स्थानों पर चलाया जा चुका है अभियान

नेत्र बैंक प्रभारी डॉ. आरती सिंह ने बताया कि नेत्रदान पखवाड़े के तहत मोतीलाल नेहरू जिला चिकित्सालय, तेज बहादुर सप्रू चिकित्सालय तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा और कोरांव में भी जागरूकता अभियान चलाए जा चुके हैं। इन अभियानों के माध्यम से अब तक कुल 410 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया है।

उन्होंने कहा कि नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। अधिक से अधिक लोगों के संकल्प लेने से भविष्य में दृष्टिहीन लोगों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल