home page

शहीद पुलिसकर्मियों के बलिदान काे बयां करती है लघु फिल्म ‘वर्दी’ : डीजीपी राजीव कृष्ण

 | 
शहीद पुलिसकर्मियों के बलिदान काे बयां करती है लघु फिल्म ‘वर्दी’ : डीजीपी राजीव कृष्ण


शहीद पुलिसकर्मियों के बलिदान काे बयां करती है लघु फिल्म ‘वर्दी’ : डीजीपी राजीव कृष्ण


फिल्म में शहीद निरीक्षक सुनील कुमार के साहस और उनके परिवार के संघर्ष को किया गया रेखांकित

लखनऊ, 22 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश पुलिस ने शहीद पुलिसकर्मियों के साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विशेष पहल करते हुए लघु फिल्म ‘वर्दी’ रिलीज की है। बॉलीवुड निर्देशक तिग्मांशु धूलिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म वर्दी पहनकर देश और समाज की सुरक्षा में जुटे पुलिसकर्मियों के बलिदान के साथ-साथ उनके परिवारों के भावनात्मक संघर्ष और अपनों को खोने के दर्द को भी सामने लाती है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण के मार्गदर्शन में तैयार इस फिल्म को उत्तर प्रदेश पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी किया गया है।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने जारी बयान में कहा कि इस फिल्म में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के शहीद निरीक्षक सुनील कुमार के अदम्य साहस और कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। शामली में मुठभेड़ के दौरान उन्होंने असाधारण वीरता का परिचय दिया था। घायल होने के बावजूद वह अपनी टीम का नेतृत्व करते रहे और कर्तव्य निभाते हुए शहीद हो गए। उनके इसी अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था।

डीजीपी ने बताया कि उनके मार्गदर्शन में बनी इस फिल्म पुलिसकर्मियों की वर्दी के पीछे छिपी उन भावनाओं और जिम्मेदारियों को सामने लाने का प्रयास है, जिन्हें आमतौर पर सार्वजनिक चर्चा में पर्याप्त जगह नहीं मिलती। फिल्म यह भी दर्शाती है कि देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों के परिवार किस तरह अपनों की याद, उनके लौटने की अधूरी उम्मीद और जीवन के संघर्ष के साथ आगे बढ़ते हैं।

फिल्म में अमित साध, अलका अमीन और नाज़िश ख़ान ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं। कहानी के माध्यम से पुलिसकर्मियों के पेशेवर दायित्वों, उनके व्यक्तिगत जीवन और परिवारों के त्याग के बीच के भावनात्मक संबंध को उभारने की कोशिश की गई है।

‘वर्दी’ के जरिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने शहीदों की वीरता और राष्ट्रसेवा की भावना को व्यापक समाज तक पहुंचाने की पहल की है। फिल्म का उद्देश्य पुलिस बल के प्रति सम्मान बढ़ाने के साथ उन परिवारों के संघर्ष को भी रेखांकित करना है, जो देश की सुरक्षा में अपने प्रियजनों का सर्वोच्च बलिदान सहते हैं।

शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की वीरता पर केंद्रित यह प्रस्तुति याद दिलाती है कि वर्दी केवल एक पहचान नहीं, बल्कि कर्तव्य, साहस, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इसके पीछे कई बार ऐसे परिवारों की अनकही कहानियां होती हैं, जिनका जीवन किसी अपने की शहादत के बाद हमेशा के लिए बदल जाता है। इसके माध्यम से पुलिस कर्मियों के त्याग और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा जन-जन तक पहुंचाने की पहल की गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा