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वाराणसी में चार वर्ष पूर्व दरोगा अजय यादव को गोली मारने वाले बदमाश लल्लन सिंह को एसटीएफ ने मार गिराया

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वाराणसी में चार वर्ष पूर्व दरोगा अजय यादव को गोली मारने वाले बदमाश लल्लन सिंह को एसटीएफ ने मार गिराया


—21 नवंबर 2022 को वाराणसी बड़ागांव इलाके में पुलिस की घेराबंदी से निकल भागा था, -तब अपराधी के दो भाइयों को पुलिस ने ढेर कर दिया था

वाराणसी, 22 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में चार वर्ष पूर्व वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र में तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर अजय यादव को गोली मारकर उनकी सरकारी पिस्टल लूटने वाले एक लाख रुपये के इनामी बदमाश लल्लन सिंह को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने सहारनपुर में बीती रात मुठभेड़ के दौरान मार गिराया। बिहार के समस्तीपुर जिले का निवासी लल्लन सिंह लंबे समय से उत्तर प्रदेश और बिहार पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था।

रविवार देर रात सहारनपुर जिले के सरसावा-नकुर रोड पर एसटीएफ की टीम से उसकी मुठभेड़ हुई। जवाबी कार्रवाई में लल्लन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसावा और बाद में जिला अस्पताल सहारनपुर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के दौरान उसका एक साथी फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।

लल्लन सिंह का नाम वर्ष 2022 में वाराणसी में उस समय सुर्खियों में आया था, जब उसने अपने भाइयों मनीष सिंह और रजनीश सिंह के साथ मिलकर रोहनिया थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर अजय यादव को गोली मार दी थी और उनकी सरकारी पिस्टल लूट ली थी। इस घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया था।

घटना के बाद 21 नवंबर 2022 को वाराणसी पुलिस ने ऑपरेशन पाताल लोक के तहत बड़ागांव क्षेत्र में बदमाशों की घेराबंदी की थी। पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ में लल्लन सिंह के दोनों भाई मनीष सिंह और रजनीश सिंह उर्फ बउआ मारे गए थे तथा लूटी गई सरकारी पिस्टल भी बरामद कर ली गई थी। हालांकि, लल्लन सिंह पुलिस को चकमा देकर फरार होने में सफल रहा था। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी पर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने एक लाख रुपये तथा चंदौली पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।

पुलिस अभिलेखों के अनुसार, लल्लन सिंह पर हत्या, पुलिसकर्मियों पर हमला, बैंक डकैती, लूट और अन्य गंभीर अपराधों के अनेक मुकदमे दर्ज थे। वर्ष 2016 में पटना के फतुहा थाना क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात सब-इंस्पेक्टर आर.आर. चौधरी की हत्या तथा उनकी सरकारी पिस्टल लूटने के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। इसके अलावा बाढ़ थाना क्षेत्र में एएसआई सुरेश ठाकुर की हत्या और चंदौली के सकलडीहा क्षेत्र में लूट की एक वारदात में भी वह वांछित था।

मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के आनंद गोलवा गांव, थाना मोहिउद्दीन नगर का निवासी लल्लन सिंह अपने भाइयों और गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश और बिहार में संगठित आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता था। पुलिस के अनुसार, वह अक्सर बिहार में वारदात करने के बाद वाराणसी और चंदौली क्षेत्र में आकर छिप जाता था।

वाराणसी में एक अखबार के वरिष्ठ अपराध पत्रकार अरशद आलम ने लल्लन सिंह के अंत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अपराध की दुनिया में चली गोली लौटकर आती जरूर है..और मौत भी लाती है। उन्होंने कहा कि लल्लन सिंह और उसके भाइयों ने बिहार से लेकर पूर्वांचल तक आतंक का नेटवर्क खड़ा कर रखा था और पुलिस पर हमले से लेकर हथियार लूटने जैसी घटनाओं के कारण वे सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता सूची में शामिल थे। ---------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी