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मृत्यु का समय पता चला तो परीक्षित ने चुना भक्ति का मार्ग : पं. शारदा देव पांडेय

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मृत्यु का समय पता चला तो परीक्षित ने चुना भक्ति का मार्ग : पं. शारदा देव पांडेय


मीरजापुर, 22 सितंबर (हि.स.)। नगर के तरकापुर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन मंगलवार को परीक्षित-सुखदेव संवाद का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास पं. शारदा देव पांडेय ने राजा परीक्षित के जीवन से जुड़े प्रसंगों का वर्णन करते हुए भक्ति, वैराग्य और आत्मकल्याण का महत्व बताया।

उन्होंने कहा कि जब राजा परीक्षित को अपने जीवन के केवल सात दिन शेष रहने का पता चला तो उन्होंने सांसारिक मोह-माया से स्वयं को अलग कर भगवान की भक्ति का मार्ग अपनाया। इसके बाद उन्होंने सुखदेव जी से जीवन और आत्मकल्याण से जुड़े प्रश्न किए। सुखदेव जी ने उन्हें भगवान की महिमा, नाम स्मरण और भक्ति के महत्व का वर्णन सुनाया।

कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य को सांसारिक जीवन के साथ आध्यात्मिक चेतना से भी जुड़ना चाहिए। भगवान के नाम का स्मरण और सत्संग मनुष्य को सही मार्ग पर ले जाने में सहायक होता है। परीक्षित-सुखदेव संवाद के प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए।

कथा के दौरान भजन और धार्मिक प्रसंगों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। कार्यक्रम में उमेश चन्द्र द्विवेदी, अभिषेक द्विवेदी, विवेक, विराट, समीर दूबे, अधिवक्ता अतुल कुमार दूबे, अजीत सिंह, अंशुमान दूबे और विनय दूबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा