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मीरजापुर में खुलेगा पैरावेटनरी कॉलेज, 200 सीटों पर होगा प्रवेश

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मीरजापुर में खुलेगा पैरावेटनरी कॉलेज, 200 सीटों पर होगा प्रवेश


मीरजापुर, 11 जून (हि.स.)। पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। मड़िहान क्षेत्र के देवरी कला स्थित डॉ. जगदीश सिंह पटेल पैरावेटनरी कॉलेज ऑफ फार्मेसी को प्रदेश सरकार ने डिप्लोमा इन वेटनरी फार्मेसी और डिप्लोमा इन लाइवस्टॉक एक्सटेंशन पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। दोनों पाठ्यक्रमों में 100-100 सीटों सहित कुल 200 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा।

शासन की मंजूरी मिलने के बाद अब विंध्य क्षेत्र के विद्यार्थियों को पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सहायक सेवाओं की तकनीकी शिक्षा के लिए दूसरे जनपदों या बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को नए अवसर प्राप्त होंगे।

अपर मुख्य सचिव, पशुधन विभाग मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा जारी आदेश में ओम साईं विंध्य विकास ट्रस्ट के आवेदन को स्वीकृति देते हुए पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति दी गई है। यह अनुमति प्रदेश सरकार की उस नई नीति के तहत दी गई है, जिसमें निजी संस्थानों को भी पैरावेटनरी शिक्षा के क्षेत्र में योगदान का अवसर दिया जा रहा है।

शासन के निर्देशानुसार संस्थान को पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ-अनुसंधान संस्थान, मथुरा द्वारा निर्धारित शैक्षणिक मानकों और पाठ्यक्रमों का पालन करना होगा। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार के सभी दिशा-निर्देशों का अनुपालन भी अनिवार्य रहेगा। जारी एनओसी दो वर्ष के लिए मान्य होगी और इस अवधि में संस्थान को विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त करनी होगी।

रोजगार और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन डॉ. जगदीश सिंह पटेल ने इसे मीरजापुर और पूरे विंध्य क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब तक इस प्रकार के संस्थान मुख्य रूप से सरकारी स्तर पर संचालित होते थे, लेकिन नई नीति के तहत निजी क्षेत्र को भी अवसर मिलने से युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा के नए द्वार खुले हैं।

हर साल तैयार होंगे 200 प्रशिक्षित पैरावेट कर्मी

विशेषज्ञों के अनुसार विंध्य क्षेत्र में पशुपालन किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन प्रशिक्षित पैरावेट कर्मियों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। कॉलेज में शुरू होने वाले इन पाठ्यक्रमों से प्रतिवर्ष 200 प्रशिक्षित युवा तैयार होंगे, जो पशु उपचार, टीकाकरण, डेयरी प्रबंधन और पशुपालन सेवाओं में अपनी भूमिका निभाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा