home page

युद्ध नहीं, बुद्ध की जरूरत, बोधि पथ कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण का संदेश

 | 
युद्ध नहीं, बुद्ध की जरूरत, बोधि पथ कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण का संदेश


- बुद्ध के मध्यम मार्ग को बताया सतत विकास की सबसे बड़ी सीख

मीरजापुर, 14 जुलाई (हि.स.)। बदलते पर्यावरण और बढ़ते वैश्विक संकट के बीच मंगलवार को केबी डिग्री कॉलेज के बीएड विभाग में आयोजित 'बोधि पथ' कार्यशाला में भगवान बुद्ध के विचारों को आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया गया। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला में वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, अहिंसा और सतत विकास पर विस्तार से विचार रखे।

मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष लालबहादुर सरोज ने कहा कि बुद्ध का मध्यम मार्ग और प्रकृति के प्रति अहिंसा का सिद्धांत आज के सतत विकास लक्ष्यों के सबसे निकट है। उन्होंने कहा कि पेड़ों, नदियों और वन्यजीवों का संरक्षण केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की भी रक्षा है। प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक कुंजी है।

नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी ने कहा कि आज के समय में युद्ध की नहीं, बल्कि बुद्ध की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. रविंद्र कुमार द्विवेदी, प्रो. बीना देवी सिंह, माँ विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय के कुलसचिव रामनारायण, परीक्षा नियंत्रक हरिश्चंद्र, डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह, डॉ. कुलदीप पांडेय, विभूति कुमार मिश्रा, प्रो. नम्रता मिश्रा, प्रो. भवभूत मिश्रा, प्रो. भानु प्रताप सिंह तथा प्रो. इंदु भूषण द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यशाला में बुद्ध के विचारों को वर्तमान समय की सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय चुनौतियों से जोड़ते हुए युवाओं को प्रकृति संरक्षण और शांतिपूर्ण जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा