नवरात्रि व्रत में खान-पान का ध्यान रखें, छोटी-सी लापरवाही भारी पड़ सकती है - डॉ अम्बरीष राय
वाराणसी, 11 अक्टूबर (हि. स.)। होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अम्बरीष कुमार राय ने नवरात्रि के प्रथम दिन पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नवरात्र व्रत में खान-पान का ध्यान रखे। छोटी-सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। फलाहार में संतुलित पोषण अपनाएं, कमजोरी और निर्जलीकरण से बचें। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
वाराणसी में भोजूवीर स्थित महावीर होम्योपैथिक क्लिनिक पर डॉ. अम्बरीष ने कहा कि नवरात्र का पर्व श्रद्धा, साधना, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। इन नौ दिनों में बड़ी संख्या में लोग व्रत रखते हैं। कुछ लोग फलाहार करते हैं, तो कुछ केवल जल या सीमित आहार लेते हैं। ऐसे में खान-पान का ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे।
फलाहार में पोषण का रखें ध्यान
व्रत में केवल आलू, साबूदाना, तली हुई चीजों और मिठाइयों पर निर्भर रहना उचित नहीं है। फलाहार में सेब, केला, पपीता, अमरूद जैसे फल, दूध, दही, थोड़े मेवे तथा व्रत में अनुमत खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन भी विकल्प हैं। भोजन कम मात्रा में, आवश्यकतानुसार और नियमित अंतराल पर लें। अत्यधिक तेल, घी, नमक और चीनी से बचें।
व्रत में हो सकती हैं ये स्वास्थ्य समस्याएं
नौ दिनों तक असंतुलित आहार या लंबे समय तक भूखे रहने से कमजोरी, थकान, सिरदर्द, चक्कर, कब्ज, गैस, एसिडिटी, मतली और नींद में परेशानी हो सकती है। पर्याप्त पानी न पीने से निर्जलीकरण तथा रक्तचाप में गिरावट का खतरा रहता है। मधुमेह के रोगियों में रक्त शर्करा कम या अधिक होने की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। गंभीर कमजोरी, बेहोशी, भ्रम या लगातार उल्टी होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
होम्योपैथी की क्या भूमिका है
व्रत के दौरान होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में सबसे पहले उनके कारण की पहचान करना आवश्यक है। होम्योपैथिक चिकित्सक मरीज के लक्षणों, स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक स्थिति का आकलन कर उचित सलाह दे सकते हैं। हालांकि, निर्जलीकरण, रक्त शर्करा में गंभीर गिरावट या अन्य आपातकालीन स्थितियों में केवल होम्योपैथिक दवाओं पर निर्भर रहना या आवश्यक उपचार में देरी करना उचित नहीं है।
किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोगों को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों और बुजुर्गों को भी विशेष सावधानी रखनी चाहिए। नियमित दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद न करें और उनकी मात्रा में स्वयं बदलाव न करें।
पर्याप्त पानी और संतुलित दिनचर्या जरूरी
फलाहार करने वाले लोग दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, समय पर भोजन करें और पर्याप्त नींद लें। निर्जल व्रत में पानी की कमी का खतरा बढ़ सकता है। यदि अत्यधिक कमजोरी, चक्कर या बेहोशी महसूस हो तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और आवश्यक चिकित्सा प्राप्त करें। नवरात्र का उद्देश्य संयम, साधना और अनुशासन है। इसलिए धार्मिक आस्था के साथ अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना भी जरूरी है। संतुलित फलाहार, पर्याप्त जल और समय पर चिकित्सकीय परामर्श से व्रत को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / शरद

