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उत्तर प्रदेश में धूमधाम से मना महानवमी का पर्व, गोरखनाथ मंदिर, विंध्य से लेकर पाटेश्वरी धाम तक हुआ कन्या पूजन व भोज की रही धूम

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उत्तर प्रदेश में धूमधाम से मना महानवमी का पर्व, गोरखनाथ मंदिर, विंध्य से लेकर पाटेश्वरी धाम तक हुआ कन्या पूजन व भोज की रही धूम


लखनऊ, 19 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में आज महानवमी के पावन अवसर पर भक्ति और उत्साह का माहौल रहा। गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर से लेकर प्रमुख शक्तिपीठों मिर्जापुर के विंध्याचल (विंध्य) और बलरामपुर के देवीपाटन (पाटेश्वरी) मंदिर, वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट धाम से लेकर सभी धार्मिक स्थलों पर विधि विधान से महानवमी पर कन्या पूजन व भोज किया गया। इस पावन तिथि पर श्रद्धालुओं ने अपने अपने घराें-मंदिराें में नौ दुर्गा के स्वरूपों के रूप में नौ कन्याओं और एक बटुक (भैरव) का पूजन किया, उनके पैर पखारे और उन्हें पूड़ी, हलवा, चना आदि का भोग लगाकर आशीर्वाद लिया।

महानवमी पर गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में महानवमी का पर्व गोरक्षपीठ की पारंपरिक रीति-नीति और भव्यता के साथ मनाया गया। पीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मंदिर में कई महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं नौ दुर्गा की प्रतीक नौ कुंवारी कन्याओं के पांव आदरपूर्वक पखारे और सभी कन्याओं के माथे पर रोली, चंदन, दही और अक्षत का तिलक लगाया, पुष्पमाला पहनाई और चुनरी ओढ़ाकर विधि-विधान से आरती उतारी। इस अवसर पर गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार कन्याओं के साथ-साथ बटुक भैरव (छोटे बालकों) का भी पूजन किया गया।

पीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूजन के बाद इन सभी कन्याओं और बटुक भैरव को अपने हाथों से पूड़ी, हलवा, सब्जी और फल का प्रसाद (भोज) परोसा। भोजन के उपरांत मुख्यमंत्री ने सभी कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उन्हें दक्षिणा व विशेष उपहार भेंट किए।

मां पाटेश्वरी धाम में पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाज से हुआ कन्या पूजन

प्रसिद्ध शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर (मां पाटेश्वरी धाम) बलरामपुर में महानवमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा, हर्षोल्लास और पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ। महानवमी की सुबह मुख्य अनुष्ठान के तहत छोटी कन्याओं को माता रानी का साक्षात स्वरूप मानकर आदरपूर्वक आमंत्रित किया गया। पुरोहितों और श्रद्धालुओं द्वारा सबसे पहले उनके चरण धोए गए और फिर माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाया गया। मां पाटेश्वरी धाम में सभी नौ स्वरूपों की प्रतीक कन्याओं को चुनरी ओढ़ाई गई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनकी भव्य आरती उतारी गई। पूजा-अर्चना के बाद कन्याओं को आदर सहित बैठाकर मंदिर का पारंपरिक महाप्रसाद—हलवा, पूड़ी, और चने का भोज कराया गया।

विंध्यधाम में भक्तों ने आदरपूर्वक कन्याओं के पैर पखारे

सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी धाम (विंध्यधाम) में महानवमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और अभूतपूर्व उत्साह के साथ मनाया गया। पूरे क्षेत्र में सुबह से ही जयकारों की गूंज रही और बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। इस अवसर पर विंध्यधाम के पुरोहितों, पंडा समाज और श्रद्धालुओं ने नन्हीं कन्याओं को साक्षात मां विंध्यवासिनी का रूप मानकर उन्हें आसन पर विराजमान किया। सबसे पहले भक्तों ने कन्याओं के पैर पखारे (धोए), फिर उनके माथे पर कुमकुम, अक्षत और चंदन का तिलक लगाया। सभी नौ स्वरूपों की प्रतीक कन्याओं को चुनरी ओढ़ाई गई और ढोल-मंजीरों के साथ उनकी महाआरती उतारी गई। प्रसाद का वितरण किया;

इसी प्रकार राम नगरी अयाेध्या, वाराणसी, संगमनगरी प्रयागराज, चित्रकूटधाम, नैमिषारण्य धाम समेत सभी विभिन्न देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां दुर्गा की आराधना की। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, सुख-शांति और खुशहाली की कामना की। नवरात्र के नौ दिनों तक चले पूजा-पाठ और अनुष्ठानों के समापन पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। कई स्थानों पर हवन के बाद आरती और प्रसाद वितरण भी किया गया। घरों में भी विधि विधान से हवन पूजन कर कन्या पूजन करने के बाद भोज कराया गया और उन्हें उपहार दिए गये। अब सभी जगह विजयादशमी का पर्व मनाने की तैयारियां चल रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह