‘मॉडल भवन विनियम 2026‘ प्रदेश में निवेश, रोजगार और आधारभूत संरचना विकास को नई दिशा प्रदान करेंगे : नंद गोपाल गुप्ता ‘नन्दी‘
उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए यूनिफाइड मॉडल भवन विनियम-2026 तैयार
औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी के समक्ष हुआ यूनिफाइड मॉडल भवन विनियम-2026 का हुआ प्रस्तुतीकरण
लखनऊ, 28 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी वाला राज्य बनाने के लक्ष्य को और अधिक गति प्रदान करने एवं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भवन निर्माण और विकास कार्यों को गति प्रदान करने के लिए अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग द्वारा यूनिफाईड मॉडल भवन विनियम-2026 तैयार किया गया है। जिसके तथ्यों का आज पिकप भवन में आयोजित बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी के समक्ष अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतीकरण किया गया। बैठक में सभी तथ्यों पर विस्तृत चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये गए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यीडा, गीडा, यूपीसीडा और यूपीडा के लिए बनाए गए यूनिफाईड मॉडल भवन विनियम से मैन्यूफेक्चरिंग, पर्यटन, आईटी, आईटीईएस, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, शिक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। प्रस्तावित यूनिफाईड मॉडल भवन विनियम-2026 को जल्द ही मंत्री परिषद के समक्ष भेजा जाएगा। जिसकी संस्तुति के बाद भवन निर्माण उपविधि को लागू किया जाएगा।
मंत्री नन्दी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को गति देने के लिए लगातार नीतिगत सुधार किए जा रहे हैं। यूनिफाइड मॉडल भवन विनियम-2026 इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो प्रदेश में विकास को नियंत्रित करने के बजाय विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस सम्बन्ध में जो भी विसंगतियां या समस्यायें आ रही हों, उन्हें शासन स्तर से दूर किया जाय।
मंत्री नंदी ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य निवेशकों, उद्यमियों और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए प्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक एवं आर्थिक केंद्र बनाना है। मॉडल भवन विनियम-2026 प्रदेश में निवेश, रोजगार और आधारभूत संरचना विकास को नई दिशा प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि नए विनियम उत्तर प्रदेश को आधुनिक, निवेश-अनुकूल और सतत विकास वाले राज्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायें। इसके लिए नए भवन विनियमों का उद्देश्य भूमि का अधिकतम और बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना, निर्माण प्रक्रिया को सरल बनाना तथा निवेशकों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। इससे उद्योगों की स्थापना तेज होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
मंत्री नन्दी ने कहा कि वर्तमान समय की औद्योगिक आवश्यकताओं, बढ़ते निवेश और आधुनिक शहरी विकास को ध्यान में रखते हुए नए मॉडल भवन विनियम तैयार किए जाने से सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भवन निर्माण नियमों में एकरूपता आएगी और प्रक्रियाएं अधिक सरल एवं पारदर्शी होंगी।
बैठक में बताया गया कि मॉडल भवन विनियम-2026 में भूमि के बेहतर उपयोग और ऊर्ध्वाधर विकास को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। नए नियमों के तहत-भू-आच्छादन, सेटबैक और पार्किंग मानकों को तर्कसंगत बनाया गया है। विभिन्न श्रेणियों में एफएआर में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सड़क की चैड़ाई के आधार पर अनुमेय एफएआर को बढ़ाया गया है। 45 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर एफएआर की अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गयी है। इससे सीमित भूमि पर अधिक आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और शहरों के अनियंत्रित विस्तार को नियंत्रित करते हुए आधुनिक एवं सघन विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
बताया गया कि नए विनियमों में भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। प्रमुख प्रावधानों में-100 वर्गमीटर तक के आवासीय भूखंडों तथा 30 वर्गमीटर तक के वाणिज्यिक भूखंडों के लिए 1 रुपये पंजीकरण शुल्क पर पंजीकरण एवं स्व-प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गयी है। निर्धारित सीमा तक तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा तैयार नक्शों के आधार पर डीम्ड स्वीकृति का प्रावधान है। डीम्ड एनओसी अप्रूवल सिस्टम विकसित करने की पहल, पुराने भवनों में कंपाउंडिंग, एडिशन एवं ऑल्टरेशन पर भी नए नियम लागू होंगे।
मॉडल भवन विनियमों में औद्योगिक उपयोग के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसमें फ्लैटेड फैक्टरी, एमएसएमई इकाइयां, गैर-एमएसएमई उद्योग, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों तथा डाटा सेंटर को शामिल किया गया है। 04 एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले औद्योगिक भूखंडों पर श्रमिकों के लिए डॉरमेट्री की सुविधा का प्रावधान किया गया है। डाटा सेंटर के लिए अतिरिक्त एफएआर और पार्किंग मानकों में राहत प्रदान की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में स्टिल्ट एवं पोडियम पार्किंग की अनुमति भी दी गई है।
आवासीय क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग, प्लॉटेड विकास और मल्टी यूनिट आवास के लिए नियमों को सरल बनाया गया है। प्रमुख प्रावधानों में-ग्रुप हाउसिंग के लिए न्यूनतम भूखंड आकार 2000 वर्गमीटर निर्धारित, 300 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर मल्टी यूनिट श्रेणी का प्रावधान, 1500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले ग्रुप हाउसिंग भूखंडों पर पोडियम पार्किंग की अनुमति, प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 के किफायती आवास मानकों को शामिल किया गया है।
इस व्यवस्था से वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए-12 मीटर या उससे अधिक चैड़ी सड़कों पर वाणिज्यिक भवनों की अनुमति, 20 कमरों तक के होटलों के लिए न्यूनतम भूखंड आकार की बाध्यता समाप्त, बड़े होटलों के लिए न्यूनतम 500 वर्गमीटर भूखंड निर्धारित, आईटी/आईटीईएस, कार्यालय और सर्विस अपार्टमेंट के लिए विशेष प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्र के लिए भी नियमों को व्यावहारिक बनाया गया है। डायग्नोस्टिक सेंटर, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब, नर्सिंग होम और अस्पतालों के लिए अलग मानक निर्धारित किए गए हैं। एम्बुलेंस पार्किंग का प्रावधान किया गया है। शैक्षणिक संस्थानों के लिए नर्सरी से विश्वविद्यालय स्तर तक भूखंड आकार को तर्कसंगत बनाया गया है। स्कूल बस पार्किंग और पिक-अप ड्रॉप-ऑफ जोन की व्यवस्था भी की गई है।
बताया गया कि मॉडल भवन विनियम-2026 में मिश्रित उपयोग और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को विशेष महत्व दिया गया है। 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों के किनारे मिश्रित उपयोग विकास को अनुमति दी जाएगी। इससे आवास, वाणिज्यिक गतिविधियों और सेवाओं का संतुलित विकास होगा तथा आधुनिक शहरों के निर्माण को गति मिलेगी।
बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, मुख्य कार्यपालक अधिकारी इन्वेस्ट यूपी विजय किरन आनन्द सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

