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विकास का मॉडल बनकर उभरेगी काशी, वार्ड प्रवास से गढ़ी नागरिक सहभागिता की तस्वीर

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विकास का मॉडल बनकर उभरेगी काशी, वार्ड प्रवास से गढ़ी नागरिक सहभागिता की तस्वीर


— विकास की जरूरत समझने की पहल, चार वर्ष से लगातार वार्डों में पहुंच रहे विधायक नीलकंठ तिवारी

- नागरिक सुझावों से बनेगा विकास का रोडमैप, काशी से देश को मिलेगा वार्ड विकास का नया माॅडल

वाराणसी, 02 अक्टूबर (हि.स.)। काशी सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में नहीं, बल्कि नागरिक सहभागिता आधारित शहरी विकास के मॉडल के रूप में भी देश के सामने अपनी नई पहचान गढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में वाराणसी दक्षिण के विधायक डाॅ. नीलकंठ तिवारी का चार वर्ष से चल रहा वार्ड प्रवास इसी बदलती तस्वीर की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है। इसका केंद्र बड़े मंचों के बजाय मोहल्ले की गली, नागरिक की समस्या और उसके सुझाव को विकास की प्रक्रिया से जोड़ना है।

विधायक डाॅ. नीलकंठ ने 19 जुलाई से दो अक्टूबर तक चले 76 दिवसीय वार्ड प्रवास में 24 वार्डों तक पहुंचकर करीब 3500 परिवारों से संवाद और 50 से अधिक जनचौपाल लगाए। लगभग 450 किलोमीटर पैदल चलकर वार्डों में पहुंचने के दौरान सड़क, सीवर, जलनिकासी, पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और अन्य स्थानीय समस्याओं को मौके पर समझने का प्रयास किया गया।

—अब जनता तय करेगी विकास की दिशा

विधायक डाॅ. नीलकंठ तिवारी ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि शहर का विकास केवल बड़ी परियोजनाओं से पूरा नहीं होता। नागरिक के लिए विकास का पहला अनुभव उसके घर के सामने की सड़क, गली की सफाई, सीवर की व्यवस्था, जलभराव से मुक्ति और पर्याप्त रोशनी में होता है। वार्ड प्रवास की कार्यशैली में इन्हीं स्थानीय जरूरतों को विकास की प्राथमिकता से जोड़ने का प्रयास किया। इस मॉडल में नागरिक केवल समस्या बताने वाला नहीं, बल्कि अपने मोहल्ले की विकास प्राथमिकताओं का सहभागी भी बने। किस काम की सबसे अधिक जरूरत है, कहां समस्या पुरानी है और किस समाधान का स्थानीय स्तर पर असर होगा—इन सवालों का जवाब वार्ड में रहने वाले नागरिकों से सीधे मिला।

—वार्ड प्रवास विकास मॉडल की आधारशिला

उन्हाेंने बताया कि वार्ड प्रवास के दौरान जनचौपाल को संवाद और समाधान के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बनाया गया। नागरिक अपनी समस्या रखते थे और संबंधित विभागों के अधिकारियों तक बात पहुंचाने का प्रयास हुआ। उन्हाेंने बताया कि इससे जनप्रतिनिधि, नागरिक और प्रशासन के बीच संवाद का एक स्थानीय तंत्र विकसित हुआ। उन्हाेंने बताया कि इसकी अगली कड़ी समाधान के बाद फीडबैक रहा। यानी समस्या सुनना, मौके पर देखना, संबंधित विभाग तक पहुंचाना, समाधान कराना और फिर नागरिक से पूछना कि काम हुआ या नहीं। उन्हाेंने बताया कि यही निरंतरता किसी अभियान को स्थायी विकास मॉडल का रूप देने की आधारशिला बन सकती है।

—चार वर्ष की निरंतरता अन्य शहरों के लिए अध्ययन का विषय

वार्ड प्रवास की चार वर्ष की निरंतरता से पुराने कार्यों का फीडबैक लेने, नई समस्याओं को पहचानने और नागरिकों से लगातार संवाद बनाए रखने का अवसर मिलता है। बुजुर्गों से संवाद, महिलाओं की समस्याएं, व्यापारियों की जरूरतें और युवाओं के सुझाव- ये सभी स्थानीय विकास की तस्वीर को व्यापक बनाते हैं। काशी के विकास की कहानी में वार्ड की आवाज को शामिल करने की यही प्रक्रिया इसे दूसरे शहरों के लिए भी अध्ययन का विषय बन सकती है।

—स्वच्छ पर्यावरण और नागरिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास

डा. नीलकंठ तिवारी ने 'हिन्दुस्थान समाचार' से बातचीत में बताया कि 76 दिनों में करीब 450 किलोमीटर पैदल चलकर वार्डों में जनसंपर्क किया गया। इसका उद्देश्य केवल लोगों तक पहुंचना नहीं, बल्कि विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं की जमीनी स्थिति को करीब से समझना भी रहा। स्वच्छता और पर्यावरण को भी वार्ड प्रवास से जोड़ा गया। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत बेनियाबाग पार्क में 101 पौधे लगाए। इससे विकास को सड़क और निर्माण कार्यों से आगे बढ़ाकर स्वच्छ पर्यावरण और नागरिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास सामने आता है।

—काशी मॉडल विकास की आधुनिक प्रयोगशाला

भारत के हर शहर की अपनी भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतें हैं। ऐसे में किसी एक शहर की पूरी व्यवस्था को हूबहू दूसरे शहर में लागू करना संभव नहीं, लेकिन नागरिक संवाद, स्थानीय प्राथमिकता, विभागीय समन्वय और समाधान के फीडबैक जैसी प्रक्रियाएं व्यापक स्तर पर अपनाई जा सकती हैं। काशी की खासियत यही हो सकती है कि यहां विकास की बड़ी राष्ट्रीय तस्वीर के साथ आखिरी गली की जरूरत को भी विकास के विमर्श का हिस्सा बनाया जाए। यदि वार्ड स्तर पर नागरिक सुझावों को नियमित रूप से दर्ज कर प्राथमिकता तय करने, विभागीय कार्रवाई और परिणाम के फीडबैक से जोड़ा जाता है तो काशी का यह प्रयोग सहभागी शहरी विकास की व्यापक कार्यपद्धति में बदल सकता है। काशी की प्राचीन पहचान के साथ विकास की आधुनिक प्रयोगशाला के रूप में नई पहचान- यही वार्ड प्रवास की सबसे बड़ी विरासत है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी