पर्यटकों की बढ़ती संख्या के अनुरूप विकसित होंगी सुविधाएं और विजिटर सेवाएं : जयवीर सिंह
पर्यटन स्थलों की सुविधाओं का होगा पूरा आकलन, जिलेवार ‘टूरिज्म मैट्रिक्स’ पर दर्ज होगी जानकारी
पर्यटन भवन में तीन अहम समीक्षा बैठकें, लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र और आर्किटेक्ट के भुगतान से लेकर बारकोड व्यवस्था तक पर हुई चर्चा
लखनऊ, 09 सितंबर (हि.स.)। वर्ष 2025 में देश में सर्वाधिक घरेलू पर्यटक संख्या दर्ज करने के बाद उत्तर प्रदेश अब देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर उपलब्ध सुविधाओं की मैपिंग करा रहा है। इसका उद्देश्य बढ़ती पर्यटकों की संख्या के अनुरूप सुविधाओं और पर्यटक सेवाओं का विकास सुनिश्चित करने के साथ आगंतुकों के अनुभव को और बेहतर बनाना है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को पर्यटन भवन में आयोजित पर्यटन विभाग, संस्कृति विभाग और उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की समीक्षा बैठकों में इस पहल पर चर्चा की गई।
पर्यटन विभाग ने इसके लिए एक प्रोफार्मा तैयार किया है, जिसमें क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्न मानकों के आधार पर जानकारी दर्ज की जाएगी। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारियों को सड़क संपर्क, परिवहन सुविधाएं, प्रकाश व्यवस्था, यात्री शेल्टर, रैंप, हिंदी एवं अंग्रेजी में साइनेज, पर्यटक सुविधा केंद्र तथा पर्यटन कार्यालयों समेत अन्य सुविधाओं की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। यह जानकारी जिलेवार ‘टूरिज्म मैट्रिक्स’ के रूप में एक समर्पित डैशबोर्ड पर दर्ज की जाएगी। इससे विभाग को प्रत्येक पर्यटन स्थल पर उपलब्ध सुविधाओं की स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी। साथ ही भविष्य में सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक पर्यटन के लिए विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में मदद मिलेगी।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी घरेलू पर्यटन गंतव्य बनकर उभरा है। पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए सुविधाओं और पर्यटक सेवाओं को भी उसी गति से विकसित करना जरूरी है। टूरिज्म मैट्रिक्स से हमें प्रत्येक पर्यटन स्थल की जरूरतों को समझने और उनके अनुरूप योजनाबद्ध तरीके से विकास करने में मदद मिलेगी।
पर्यटन स्थलों पर शिलालेख और बारकोड व्यवस्था की प्रगति पर भी बैठक में प्रमुखता से चर्चा हुई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 575 परियोजनाओं में शिलालेख और बारकोड की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। इनमें से नार्दानंद ऋषि आश्रम मैनपुरी, सामौर बाबा धाम फिरोजाबाद, वनखंडेश्वर मंदिर ऊखरैंड, च्यवन ऋषि आश्रम मैनपुरी, राधा कृष्ण मंदिर फिरोजाबाद, प्रसिद्ध कल्याणी माता मंदिर प्रयागराज, श्री दुर्वासा आश्रम प्रयागराज, शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर प्रयागराज, श्री दशाश्वमेध मंदिर प्रयागराज, पगला नंद आश्रम प्रयागराज, कमम्हिया बाबा मंदिर अयोध्या, अयोध्या का प्राचीन शिवाला मंदिर, प्राचीन ज्वाला देवी मंदिर सुचित्तागंज-सोहावल और गहनाग बाबा मंदिर अयोध्या में शिलालेख लगाए जा चुके हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा अन्य स्थानों पर संचालित परियोजनाओं में बारकोड युक्त शिलालेख स्वीकृत किए गए हैं, जिन्हें संबंधित कार्यदायी संस्थाओं की ओर से लगाया जा रहा है। इसके उन्होंने अलावा भारत सरकार से संबंधित योजनाओं की प्रगति और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार की संभावित योजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की। शासन और निदेशालय के बीच लंबित प्रकरणों तथा पर्यटन मंत्री के 08 अप्रैल 2026 और 09 अप्रैल 2026 के पत्रों के अनुपालन की स्थिति पर भी अधिकारियों से जानकारी ली।
बैठक में जिला महोत्सवों के आयोजन की भी समीक्षा हुई। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक जिला महोत्सवों के लिए उपलब्ध कराई गई धनराशि के सापेक्ष आयोजित कार्यक्रमों का विवरण और उनके उपयोगिता प्रमाण-पत्रों की स्थिति पर चर्चा की गई। इसके साथ ही प्रदेश में संचालित राही पर्यटक आवास गृहों को प्रबंधकीय संविदा पर संचालित करने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने संबंधित कार्यों की स्थिति की जानकारी लेते हुए लंबित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने संस्कृति विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी बैठक में विशेष ध्यान दिया। पुरातत्व विभाग के संरक्षण कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान में सुरक्षित रखी गई धनराशि के उपयोग की समीक्षा की। इसके साथ ही संस्कृति विभाग के अधीनस्थ अकादमियों में वर्तमान में रिक्त तथा आगामी छह माह में रिक्त होने वाले पदोन्नति वाले पदों पर पदोन्नति की कार्रवाई की स्थिति भी देखी। इन दोनों विषयों पर संस्कृति विभाग से संबंधित अधिकारियों से आवश्यक जानकारी ली।
इस बैठक में पर्यटन और संस्कृति विभाग से जुड़े विभिन्न कार्यों की प्रगति, लंबित मामलों के निस्तारण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। पर्यटन परियोजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और सुविधाओं के बेहतर क्रियान्वयन के साथ पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सूचना व्यवस्था विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। शिलालेख और बारकोड जैसी व्यवस्थाओं के जरिए पर्यटकों को स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश की पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को व्यवस्थित रूप से सामने लाने की दिशा में काम आगे बढ़ाने पर जोर रहा।
बैठक में प्रदेश के सभी 75 जिलों में पर्यटन और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘संस्कृति उत्सव’ आयोजित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके तहत युवा पर्यटन क्लब और सांस्कृतिक क्लबों के माध्यम से स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, खासकर जेन जी और जेनरेशन अल्फा के युवाओं को नृत्य, नाटक और संगीत जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। साथ ही प्रदेशभर में उभरती प्रतिभाओं की पहचान कर युवा कलाकारों के लिए नए अवसर तैयार किए जाएंगे। अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने संस्कृति विभाग को नई प्रतिभाओं की पहचान के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने और उभरते कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रस्तावित संग्रहालय विकास योजना के साथ चल रहे संग्रहालयों, सांस्कृतिक केंद्रों और पांडुलिपि संरक्षण परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रस्तावित सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इसके तहत संस्कृति विभाग प्रदेशभर में ‘नमो सेवा गाथा’ नुक्कड़ नाटकों का आयोजन करेगा, जबकि पर्यटन और संस्कृति विभाग संयुक्त रूप से चयनित स्मारकों एवं पर्यटन स्थलों पर लेजर शो आयोजित करेंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि गोेकुल बैराज के पास विकसित की जा रही ‘वासुदेव वाटिका’ का करीब 72 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 15 दिसंबर तक पूरा होने वाली यह परियोजना गोकुल से जुड़ी भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से प्रेरित सांस्कृतिक एवं मनोरंजन स्थल के रूप में विकसित की जा रही है।
बैठक में गोकुल और बरसाना में पर्यटक सुविधाओं के विकास, गोवर्धन और वृंदावन परिक्रमा मार्गों पर चल रहे कार्यों, कुंडों के जीर्णोद्धार, पार्किंग सुविधाओं तथा ब्रज की प्राकृतिक विरासत से जुड़े प्रोजेक्टों की भी समीक्षा हुई। इसके अलावा संत कबीर अकादमी की कार्यकारिणी परिषद की बैठक में संत कबीर के जीवन, दर्शन और साहित्यिक विरासत पर शोध को बढ़ावा देने तथा उनकी विचारधारा और रचनात्मक विरासत से व्यापक स्तर पर लोगों को जोड़ने के लिए संचालित कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। बैठक में पर्यटन विभाग के विशेष सचिव व निदेशक मृदुल चौधरी एवं संस्कृति विभाग की विशेष सचिव दीपारंजन समेत अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

